दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग पर सुनवाई; सांसदों ने मांगा एक महीने का अतिरिक्त समय
नई दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस से एनसीपी में शामिल हुए 20 सांसदों की अयोग्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जल्द फैसला लेने की जरूरत बताई। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने कहा कि लोकसभा स्पीकर को इस मामले का समाधान तय समय-सीमा के भीतर करना चाहिए।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से संबंधित सांसदों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। हालांकि, मेहता ने यह भी कहा कि मामले में कोई निश्चित समय-सीमा तय करना उचित नहीं होगा।
4 हफ्ते में फैसला लेने की बात कही
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि उसे उम्मीद है कि लोकसभा स्पीकर इस मामले में अगले चार सप्ताह के भीतर फैसला लेंगे। कोर्ट ने संबंधित सांसदों से भी अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।
मामले में काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंदोपाध्याय समेत अन्य सांसदों को 22 सितंबर तक अपना जवाब दाखिल करना था। हालांकि, समय-सीमा समाप्त होने के बाद इन सांसदों ने स्पीकर से जवाब देने के लिए करीब एक महीने का अतिरिक्त समय मांगा है।
अभिषेक बनर्जी ने की थी अयोग्यता की मांग
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने 14 जून को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के समक्ष याचिका दाखिल कर 20 सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की।
याचिका में दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। अभिषेक का आरोप था कि इन सांसदों के राजनीतिक दल बदलने के बाद उनकी सदस्यता पर फैसला किया जाना चाहिए।
स्पीकर की ओर से तत्काल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिए जाने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित सांसदों को नोटिस जारी किया था और लोकसभा स्पीकर तथा महासचिव से भी जवाब मांगा था।
सांसदों को जारी हुआ था नोटिस
इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने स्पीकर की ओर से संबंधित सांसदों को नोटिस भेजकर उनका पक्ष मांगा। जवाब दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 सितंबर तय की गई थी।
अब सुदीप बंदोपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार और अन्य सांसदों ने अतिरिक्त समय की मांग की है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर स्पीकर से जल्द निर्णय की उम्मीद जताई है।
मामले की अगली प्रक्रिया अब इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित सांसद अतिरिक्त समय की मांग के बाद कब अपना जवाब दाखिल करते हैं और लोकसभा स्पीकर इस पूरे मामले पर क्या फैसला लेते हैं।
































