गंगाजल छिड़ककर कुर्सी पर बैठे नवनिर्वाचित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
बांकुड़ा : पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बांकुड़ा जिले की राजनीति में भाजपा की पकड़ मजबूत होती दिखाई दे रही है। दुर्गापूजा से पहले जिले की कई ग्राम पंचायतों पर कब्जे के बाद अब भाजपा ने पहली पंचायत समिति पर भी अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। बुधवार को सोनामुखी पंचायत समिति के अध्यक्ष पद पर भाजपा के कुंतल कोनार और उपाध्यक्ष पद पर ममता आंकुड़े निर्वाचित हुए।
चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद नवनिर्वाचित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने अपनी कुर्सियों पर बैठने से पहले गंगाजल छिड़का। इसके बाद दोनों ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ अबीर खेलकर जीत का जश्न मनाया।
2023 में तृणमूल को मिला था बहुमत
2023 के पंचायत चुनाव में सोनामुखी पंचायत समिति की कुल 28 सीटों में से भाजपा ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि तृणमूल कांग्रेस के खाते में 20 सीटें आई थीं। बहुमत के आधार पर तृणमूल ने पंचायत समिति का बोर्ड गठित किया था।
हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ। इसके बाद सोनामुखी पंचायत समिति के तत्कालीन अध्यक्ष कुशल बंद्योपाध्याय और उपाध्यक्ष अंतरा बागदी ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके चलते अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद कई महीनों तक खाली रहे।
इस बीच, सोनामुखी पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली तृणमूल संचालित कई ग्राम पंचायतों पर भी भाजपा ने अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। आखिरकार प्रशासन ने खाली पदों को भरने और लंबे समय से जारी गतिरोध खत्म करने के लिए बुधवार को चुनाव कराने का फैसला किया।
गंगाजल छिड़ककर संभाली जिम्मेदारी
बिष्णुपुर महकमा प्रशासन की ओर से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराया गया। इसमें भाजपा के कुंतल कोनार अध्यक्ष और भाजपा की ममता आंकुड़े उपाध्यक्ष चुनी गईं।
पदभार संभालने से पहले दोनों ने अपनी कुर्सियों पर गंगाजल छिड़का। इसके बाद पार्टी समर्थकों के साथ जश्न मनाया। इस घटनाक्रम की स्थानीय राजनीति में चर्चा हो रही है।
नवनिर्वाचित अध्यक्ष कुंतल कोनार ने कहा कि देवीपक्ष के दौरान उनकी पार्टी ने गांवों का अधिकार गांव के लोगों को वापस दिलाया है। उन्होंने पूर्व अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे सोनामुखी शहर के निवासी थे और गांव के लोगों की समस्याओं को ठीक से नहीं समझते थे।
कुंतल कोनार ने कहा, “मैं गांव का रहने वाला हूं और किसान परिवार से आता हूं। पंचायत समिति के सभी सदस्यों को साथ लेकर ग्रामीणों के समग्र विकास के लिए काम करूंगा।”
मंत्री दिवाकर घरामी ने क्या कहा?
सोनामुखी के विधायक और राज्य सरकार में वन, पर्यावरण एवं सहकारिता विभाग के राज्य मंत्री दिवाकर घरामी ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल संचालित पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के इस्तीफे के कारण प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो गया था।
मंत्री ने दावा किया कि बुधवार को इस गतिरोध को समाप्त करते हुए भ्रष्टाचार-मुक्त और पारदर्शी पंचायत समिति के गठन की दिशा में कदम उठाया गया है।
बांकुड़ा की राजनीति में क्या होगा असर?
सोनामुखी पंचायत समिति पर भाजपा का नियंत्रण स्थापित होना बांकुड़ा जिले की स्थानीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। 2023 के पंचायत चुनाव में तृणमूल को स्पष्ट बहुमत मिला था, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक हालात में पंचायत समिति के शीर्ष पदों पर भाजपा के प्रतिनिधि निर्वाचित हुए हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि नई अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के नेतृत्व में पंचायत समिति ग्रामीण विकास, कृषि और स्थानीय नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर किस तरह काम करती है।































