दुर्गा पूजा से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट से मिली राहत
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के पूर्व विधायक और पूर्व पार्षद सब्यसाची दत्ता को कथित वसूली मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। मंगलवार को अदालत ने उनकी जमानत याचिका मंजूर की। दुर्गा पूजा से ठीक पहले आए इस फैसले के बाद उनके जेल से बाहर आने की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, उनकी रिहाई की वास्तविक स्थिति अदालत की शर्तों और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
सब्यसाची दत्ता को इस साल जून में वर्ष 2018 में दर्ज वसूली की शिकायत के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से वह जेल में बंद थे। जमानत के लिए उन्होंने कई बार अदालत का दरवाजा खटखटाया, लेकिन शुरुआती प्रयासों में उन्हें राहत नहीं मिली। अब करीब चार महीने बाद हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।
2018 की शिकायत के आधार पर हुई थी गिरफ्तारी
मिली जानकारी के मुताबिक, बिधाननगर उत्तर थाने की पुलिस ने 8 जून की रात राजारहाट स्थित आवास से सब्यसाची दत्ता को गिरफ्तार किया था। मामला वर्ष 2018 में एक स्थानीय कारोबारी से कथित तौर पर एक करोड़ रुपये मांगने के आरोप से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, कारोबारी से रकम मांगने के लिए उनके नाम पर कुछ लोगों को भेजा गया था।
पुलिस ने गिरफ्तारी के 57 दिनों के भीतर बारासात अदालत में करीब 1,730 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। जांच के दौरान सब्यसाची दत्ता के करीबी माने जाने वाले कुछ लोगों से भी पूछताछ की गई। मामले में सामने आए आर्थिक लेनदेन और संपत्ति से जुड़े तथ्यों की भी जांच की गई।
दूसरे आरोपी को पहले ही मिल चुकी थी अंतरिम जमानत
इस मामले में आरोपी विद्युत गंगोपाध्याय को पहले ही अंतरिम जमानत मिल चुकी थी। वहीं, सब्यसाची दत्ता की जमानत याचिकाएं पहले खारिज हो गई थीं। अब हाईकोर्ट से उन्हें अंतरिम राहत मिलने के बाद उनके कानूनी मामले में अगला चरण महत्वपूर्ण होगा।
अंतरिम जमानत का अर्थ यह है कि अदालत ने निर्धारित अवधि या शर्तों के तहत अस्थायी राहत दी है। इसे मामले से स्थायी मुक्ति या आरोपों से बरी होना नहीं माना जाता।
जांच एजेंसियों की छापेमारी में नकदी और सोना मिलने का दावा
मामले की जांच के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसियों ने सब्यसाची दत्ता और उनके कथित सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 19 ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली गई थी। जांच एजेंसियों ने तलाशी के दौरान मिली संपत्ति और दस्तावेजों का विवरण भी सामने रखा था।
सब्यसाची दत्ता की करीबी मानी जाने वाली नदिया जिला परिषद की तृणमूल कांग्रेस सदस्य टीना भौमिक साहा के करीमपुर स्थित पैतृक आवास पर भी तलाशी ली गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, वहां से लगभग तीन किलोग्राम सोने के आभूषण बरामद किए गए थे। उस समय इनकी अनुमानित कीमत करीब 4.39 करोड़ रुपये बताई गई थी। चार्जशीट में भी कथित तौर पर इस सोने से संबंधित विवरण शामिल किया गया है।
ED की जांच में विदेशी मुद्रा और डिजिटल उपकरणों की भी जांच
मामले में कथित अवैध धन लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी शुरू की थी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, तलाशी के दौरान सब्यसाची दत्ता और उनके सहयोगियों से जुड़े ठिकानों से लगभग 40.5 लाख रुपये नकद, विदेशी मुद्रा, डिजिटल उपकरण और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से संबंधित खाते या रिकॉर्ड मिलने की बात कही गई थी।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ खातों में जमा रकम का कुल आंकड़ा कम से कम 14 करोड़ रुपये था। हालांकि, इन संपत्तियों और लेनदेन के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।
पूजा से पहले जमानत के फैसले पर नजर
सब्यसाची दत्ता को अंतरिम जमानत मिलने के बाद अब उनके जेल से बाहर आने और अदालत की ओर से तय शर्तों के पालन पर नजर रहेगी। यह राहत फिलहाल वसूली मामले में उनकी हिरासत से संबंधित है। मामले की जांच और आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है।
दुर्गा पूजा से पहले हाईकोर्ट के इस फैसले ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा बढ़ा दी है।































