पूर्व मंत्री सबिना यास्मिन ने पद छोड़ा
कोलकाता : पश्चिम बंगाल की पूर्व मंत्री और सुजापुर की विधायक सबिना यास्मिन ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले लोकतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस (DTC) में महिला शाखा के प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे के कारणों का उल्लेख करते हुए DTC के प्रदेश अध्यक्ष बिप्लब मित्रा को पत्र भेजा है। सबिना के मुताबिक, अपनी मौजूदा शारीरिक और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वह इस जिम्मेदारी को ठीक से निभाने में असमर्थ हैं।
महिला शाखा की प्रदेश अध्यक्ष के पद से दिया इस्तीफा
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक मतभेद सामने आए थे। इसके बाद करीब 60 विधायकों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट से अलग होकर ऋतब्रत बनर्जी के खेमे का समर्थन किया था। इन विधायकों ने ऋतब्रत को विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में चुना था।
वहीं, ममता बनर्जी के खेमे की ओर से वरिष्ठ नेता और बालीगंज के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने की इच्छा जताई गई थी। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट से अलग होकर ऋतब्रत के खेमे में शामिल होने वाले विधायकों में सुजापुर की विधायक सबिना यास्मिन भी थीं।
ऋतब्रत के खेमे में सबिना को महिला शाखा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, बुधवार को उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया।
अपने इस्तीफे के बारे में सबिना यास्मिन ने कहा कि उन्हें तृणमूल कांग्रेस की महिला शाखा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। अब पद छोड़ दिया हूँ ।”
सबिना ने स्पष्ट किया कि उनके फैसले के पीछे संगठन के प्रति असहमति से अधिक उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियां हैं। उन्होंने कहा कि इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए उन्हें पूरे पश्चिम बंगाल में लगातार दौरे करने पड़ेंगे, लेकिन फिलहाल उनकी शारीरिक स्थिति और पारिवारिक परिस्थितियां इसकी अनुमति नहीं देतीं।
शारीरिक और पारिवारिक परिस्थितियों का दिया हवाला
इस्तीफे की वजह बताते हुए सबिना यास्मिन ने कहा, “इस जिम्मेदारी को संभालने के लिए मुझे पूरे राज्य में घूमना पड़ेगा। फिलहाल मेरी शारीरिक और पारिवारिक परिस्थितियां ऐसी हैं कि मेरे लिए यह जिम्मेदारी निभाना संभव नहीं है। बेवजह पद पर बने रहने का क्या फायदा?”
उन्होंने बताया कि अपना इस्तीफा उन्होंने व्हाट्सऐप के जरिए ऋतब्रत गुट के प्रदेश अध्यक्ष बिप्लब मित्रा को भेज दिया है।
सबिना के इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में ऋतब्रत बनर्जी के खेमे की संगठनात्मक गतिविधियों पर नजर रहेगी। हालांकि, उनके बयान के मुताबिक, पद छोड़ने का प्रमुख कारण मौजूदा शारीरिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते जिम्मेदारी निभाने में असमर्थता है।































