महिला सशक्तिकरण, बाल विवाह रोकथाम और नशामुक्त बंगाल पर मुख्यमंत्री ने गिनाईं सरकार की प्राथमिकताएं; अन्नपूर्णा योजना की चौथी किस्त जारी करने का ऐलान
कोलकाता : अन्नपूर्णा दिवस के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पिछली सरकार की नीतियों पर निशाना साधते हुए अपनी सरकार की प्राथमिकताएं गिनाईं। बिधाननगर बुक फेयर ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल लोगों को भत्ता देना नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक सुधार लाना है। हालांकि, अपने संबोधन में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम नहीं लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार नशामुक्त पश्चिम बंगाल बनाने के लिए काम कर रही है। इसके साथ ही बाल विवाह और कम उम्र में मातृत्व की समस्या को खत्म करने को भी सरकार ने प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा, “यह सरकार सिर्फ भत्ता बांटने के लिए नहीं आई है, बल्कि सुधार लाने के लिए आई है।”
महिलाओं की सुरक्षा पर सख्त रुख
सुवेंदु ने महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों पर सरकार के रुख को भी स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि सरकार के शुरुआती कामों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचार से निपटने के लिए एक आयोग का गठन करना शामिल है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “जो कोई भी मां या बहन के साथ अत्याचार करेगा, उसे हम बख्शेंगे नहीं।”
अन्नपूर्णा योजना की चौथी किस्त जारी
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अन्नपूर्णा योजना की चौथी किस्त जारी करने की घोषणा की। उन्होंने दावा किया कि अब तक डेढ़ करोड़ से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में राशि भेजी जा चुकी है। बाकी पात्र लाभार्थियों के खातों में भी दिनभर में रकम पहुंचने की बात उन्होंने कही।
मुख्यमंत्री के अनुसार, योजना के तहत महिलाओं के खातों में हर महीने 3,000 रुपये जमा किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री आवास योजना के घर महिलाओं के नाम
सुवेंदु ने प्रधानमंत्री आवास योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य में 50 लाख से अधिक नए घर बनाने के लिए लाभार्थियों की सूची तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि इन घरों का स्वामित्व महिलाओं के नाम सुनिश्चित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले घरों के समझौते महिलाओं के नाम पर किए जाएंगे, ताकि परिवार की संपत्ति में महिलाओं की हिस्सेदारी और अधिकार मजबूत हो।
लड़कियों की पढ़ाई और आर्थिक मदद पर जोर
मुख्यमंत्री ने लड़कियों और महिलाओं के लिए सरकार की अन्य योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के वेतन में 5,000 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
उन्होंने बताया कि 14 अगस्त को ‘कन्या रत्न दिवस’ के अवसर पर लड़कियों के बैंक खातों में 1,000 रुपये की राशि भेजी गई। अगले साल इस राशि को बढ़ाकर 2,000 रुपये करने की घोषणा भी की गई।
बाल विवाह रोकने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की किसी लड़की की शादी नहीं होने दी जाएगी। इसके अलावा, उच्च माध्यमिक के बाद लड़कियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए स्नातक स्तर पर तीन वर्षों में कुल 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण को सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए कहा कि आर्थिक सहायता के साथ-साथ शिक्षा, सुरक्षा और सामाजिक सुधार पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाएगा।
































