कोलकाता : नंदीग्राम उपचुनाव में BJP उम्मीदवार हसीरानी रथ के चुनावी हलफनामे को लेकर कांग्रेस की ओर से दायर याचिका को कलकत्ता हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। मंगलवार को जस्टिस कृष्ण राव की बेंच ने मामले में फैसला सुनाया। कांग्रेस ने हसीरानी रथ की शैक्षणिक योग्यता और जन्मतिथि से संबंधित जानकारी पर सवाल उठाते हुए उनकी उम्मीदवारी रद्द करने की मांग की थी।
1965 में मैट्रिक पास करने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस की याचिका में दावा किया गया था कि हसीरानी रथ ने चुनावी हलफनामे में अपनी शैक्षणिक योग्यता के तौर पर सेकेंडरी स्कूल सर्टिफिकेट का उल्लेख किया है। इसमें उनके 1965 में सेकेंडरी परीक्षा पास करने की जानकारी होने की बात कही गई थी।
कांग्रेस ने उनकी उम्र से जुड़ी जानकारी के आधार पर सवाल उठाया कि अगर हसीरानी का जन्म 1966 में हुआ था, तो 1965 में उन्होंने सेकेंडरी परीक्षा कैसे पास की। इसी आधार पर कांग्रेस ने हलफनामे में दी गई जानकारी को लेकर हाई कोर्ट का रुख किया था।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि हसीरानी रथ ने चौखली गंगाखली गर्ल्स स्कूल से सेकेंडरी परीक्षा पास करने की जानकारी दी है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि अगर उम्र और शैक्षणिक प्रमाणपत्र में से किसी एक में गलती है, तो उसकी जांच होनी चाहिए।
नामांकन रद्द करने की मांग
कांग्रेस की ओर से दायर याचिका में हसीरानी रथ का नामांकन रद्द करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि चुनावी हलफनामे में दी गई जानकारी में कथित विसंगति उम्मीदवार की उम्मीदवारी पर सवाल खड़ा करती है।
हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इस याचिका का विरोध किया गया। आयोग के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि उम्मीदवार के नामांकन की जांच के दौरान किसी भी आपत्ति को निर्धारित प्रक्रिया के तहत उठाया जाना चाहिए था।
चुनाव आयोग ने क्या दलील दी?
चुनाव आयोग की ओर से अदालत में कहा गया कि नामांकन दाखिल होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा स्क्रूटनी के दौरान आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान है। यदि उस चरण में कोई आपत्ति नहीं उठाई गई, तो बाद में उसी आधार पर नामांकन रद्द करने की मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आयोग की ओर से यह भी दलील दी गई कि किसी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के वास्तविक या फर्जी होने का सवाल अलग जांच का विषय हो सकता है और केवल इस आधार पर उम्मीदवार का नामांकन रद्द करने का मामला स्वतः नहीं बनता।
हसीरानी के वकील ने भी दी दलील
हसीरानी रथ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जॉयदीप कर ने अदालत में कहा कि नामांकन की स्क्रूटनी के समय इस मुद्दे पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई थी। ऐसे में बाद में इस आधार पर उम्मीदवार के खिलाफ कार्रवाई की मांग नहीं की जा सकती।
उन्होंने यह भी दलील दी कि हलफनामे में यदि कोई गलती हुई भी है, तो उसे जानबूझकर की गई गलती नहीं माना जा सकता। शुक्रवार को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस कृष्ण राव ने फैसला सुरक्षित रखा था।
मंगलवार को अदालत ने कांग्रेस की याचिका खारिज कर दी।
6 अक्टूबर को नंदीग्राम में उपचुनाव
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। यह सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई है।
BJP ने इस उपचुनाव में हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। वह दिवंगत चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ रथ को शुभेंदु अधिकारी का करीबी सहयोगी बताया जाता था और विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद उनकी हत्या कर दी गई थी।
नंदीग्राम उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन करने का फैसला किया है। मिलन प्रधान को एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें हाल ही में कलकत्ता हाई कोर्ट से चुनाव में हिस्सा लेने के लिए अंतरिम जमानत मिली है।































