दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
कोलकाता : दिव्यांगजनों के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 31वें दिव्य कला मेले (Divya Kala Mela) का मंगलवार को कोलकाता में भव्य शुभारंभ हुआ। यह मेला दिव्यांग कारीगरों, कलाकारों और उद्यमियों को अपनी प्रतिभा, हस्तशिल्प, कलाकृतियों और अन्य उत्पादों को प्रदर्शित करने तथा उन्हें बाजार उपलब्ध कराने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रहा है।
इस अवसर पर आयोजित उद्घाटन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि दिव्य कला मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की एक सशक्त पहल है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन दिव्यांगजनों को अपनी कला और हुनर के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और सम्मान को भी बढ़ाते हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा गया कि दिव्य कला मेला दिव्यांगजनों के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशन का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। यह मेला दिव्यांग कारीगरों और उद्यमियों को अपने हस्तशिल्प, कलाकृतियों, हस्तनिर्मित उत्पादों और अन्य वस्तुओं के प्रदर्शन एवं विपणन के लिए समर्पित मंच उपलब्ध कराता है। इससे उनकी आजीविका के अवसर बढ़ते हैं, आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और समाज में उनकी पहचान को नई मजबूती मिलती है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि मेले में आयोजित दिव्यांग कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इस बात का सशक्त संदेश देती हैं कि शारीरिक सीमाएं कभी भी प्रतिभा, रचनात्मकता और उत्कृष्टता को सीमित नहीं कर सकतीं। ऐसे कार्यक्रम समाज को अधिक संवेदनशील, समावेशी और करुणामय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार की पहली संयुक्त पहल
स्वागत भाषण में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (Department of Empowerment of Persons with Disabilities – DEPwD) के संयुक्त सचिव श्री राजीव शर्मा ने कहा कि 31वां दिव्य कला मेला दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए भारत सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार की पहली संयुक्त पहल है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर दिव्यांगजनों को बेहतर अवसर, सम्मान और आत्मनिर्भरता प्रदान करने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस मेले के माध्यम से दिव्यांग कारीगरों और कलाकारों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आय बढ़ेगी और उनके उत्पादों को व्यापक पहचान मिलेगी।कार्यक्रम के अंत में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. संदीप राठौर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी विभागों, प्रतिभागियों और आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में शामिल हुए ये गणमान्य अतिथि
उद्घाटन समारोह में कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं, जिनमें शामिल हैं—केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले, पश्चिम बंगाल के शहरी विकास एवं नगर मामलों के राज्य मंत्री उमेश राय. दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) के वरिष्ठ अधिकारी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधिकारी, विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधि, बड़ी संख्या में दिव्यांग कलाकार, कारीगर, उद्यमी और आम नागरिक.
दिव्य कला मेला क्यों है खास?
- दिव्यांग कारीगरों और उद्यमियों को अपने उत्पाद बेचने का मंच।
- हस्तशिल्प, कलाकृतियां, घरेलू उत्पाद, हस्तनिर्मित वस्तुएं और अन्य उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री।
- दिव्यांग कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन।
- दिव्यांगजनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की पहल।
- समाज में समान अवसर, सम्मान और समावेशिता का संदेश।






























