‘सुप्रीम’ कोर्ट पहुंचा साबर्ण परिवार! CBI जांच की मांग।20 साल पुराने विवाद के बाद फिर गरमाया मामला । मंदिर की संपत्ति और गहनों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल।
कोलकाता : कालीघाट मंदिर की व्यवस्था, संपत्ति और दक्षिणाकाली के गहनों को लेकर विवाद एक बार फिर सामने आ गया है। साबर्ण रायचौधुरी परिवार परिषद ने मंदिर में कथित अनियमितताओं और गहनों से जुड़े मामलों की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। इस संबंध में परिषद के सचिव देबर्षि रायचौधुरी ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
परिषद ने कहा है कि यदि सीबीआई जांच संभव नहीं है तो हाई कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जाए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कालीघाट मंदिर के लिए नई प्रबंधन समिति गठित करने की मांग भी की गई है।
मंदिर की प्रबंधन व्यवस्था पर भी सवाल
पत्र में प्रस्तावित नई समिति में जिला जज, केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ साबर्ण परिवार के दो सदस्यों तथा प्रतिष्ठित नागरिकों को शामिल करने की मांग की गई है। परिषद का आरोप है कि लंबे समय से मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता का अभाव है और प्रबंधन समिति का चुनाव भी वर्ष 2014 के बाद नहीं हुआ।
देबर्षि रायचौधुरी के मुताबिक, इस मामले को लेकर पहले दक्षिण 24 परगना के जिला जज से संपर्क किया गया था, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजना पड़ा। उन्होंने संकेत दिया कि यदि यहां से भी कोई कार्रवाई नहीं होती है तो परिषद जनहित याचिका दायर करने पर विचार कर सकती है।
1980 से गायब है वॉल्ट की चाबी?
सबसे गंभीर सवाल मंदिर की दक्षिणाकाली के गहनों को लेकर उठाया गया है। परिवार परिषद का दावा है कि मंदिर के गहने एक सरकारी बैंक के वॉल्ट में रखे गए हैं, लेकिन उस वॉल्ट की चाबी वर्ष 1980 से उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वॉल्ट के भीतर वास्तव में कौन-कौन से गहने मौजूद हैं और उनकी स्थिति क्या है, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
गौरतलब है कि मंदिर की संपत्ति को लेकर वर्ष 2006 में भी कलकत्ता हाई कोर्ट में मामला पहुंचा था। अब करीब दो दशक बाद गहनों और संपत्ति के दस्तावेजों को लेकर साबर्ण परिवार की सक्रियता ने कालीघाट मंदिर की व्यवस्था पर फिर बहस छेड़ दी है।
































