जलवायु परिवर्तन के जोखिमों और आपदा तैयारी पर बच्चों, अभिभावकों व स्थानीय लोगों से संवाद; वैज्ञानिक जानकारी को सरल भाषा में पहुंचाने पर जोर
सुंदरवन : जलवायु परिवर्तन और उससे जुड़े पर्यावरणीय जोखिमों के प्रति जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से संखाचिल दैनिक समाचार पत्र और रेमेक्स वेलफेयर ट्रस्ट की ओर से 5 सितंबर 2026 को सुंदरबन क्षेत्र में एक सामाजिक पहल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्थानीय निवासियों को जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय चुनौतियों और भविष्य की तैयारियों से जुड़े विषयों पर जागरूक किया गया।
इस अवसर पर मां सारदा ट्यूटोरियल सेंटर के विद्यार्थियों के साथ सौविक चोंगदर ने संवाद किया। चोंगदर IPCC के ‘Climate Change and Cities’ विषय के Expert Reviewer, संखाचिल के संपादक और अंतरराष्ट्रीय जलवायु शोधकर्ता हैं। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान अपना Climate Change Communication and Education Model प्रस्तुत किया।
इस मॉडल का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन जैसे जटिल वैज्ञानिक विषयों को सरल और सहज तरीके से लोगों तक पहुंचाना है। इसमें वैज्ञानिक जानकारी को स्थानीय परिस्थितियों, लोगों के अनुभवों और व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल किताबों तक सीमित न रहे, बल्कि आम लोगों की समझ और रोजमर्रा की तैयारी का हिस्सा बने।
बच्चों को बनाया जाएगा जलवायु जागरूकता का सक्रिय भागीदार
कार्यक्रम में सौविक चोंगदर ने कहा कि जलवायु शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। बच्चों और युवाओं को जलवायु परिवर्तन से संबंधित जानकारी हासिल करने के साथ-साथ जागरूकता फैलाने और अपने समुदाय को तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
उनके अनुसार, Climate Communication and Education Model वैज्ञानिक ज्ञान, स्थानीय अनुभव, प्रभावी संचार और व्यावहारिक शिक्षा को एक साथ जोड़ता है। इसके जरिए विद्यार्थी जलवायु जोखिम, पर्यावरणीय बदलाव, आपदा प्रबंधन और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण की जरूरत को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
सुंदरबन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए उपयोगी मॉडल
पश्चिम बंगाल का सुंदरबन जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय जोखिमों के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है। ऐसे क्षेत्रों में चक्रवात, बाढ़, नदी कटाव, तटीय क्षरण और चरम मौसम जैसी चुनौतियों के बीच स्थानीय स्तर पर जागरूकता और आपदा तैयारी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि स्कूलों, परिवारों और स्थानीय समुदायों को जलवायु शिक्षा से जोड़कर ऐसे ‘Climate Gatekeepers’ तैयार किए जा सकते हैं, जो स्कूल में सीखी जानकारी को अपने परिवार और आसपास के लोगों तक पहुंचाएं। इससे सामुदायिक स्तर पर जलवायु सहनशीलता और आपदा तैयारी को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
मीडिया, शिक्षा और सामाजिक संगठनों की साझेदारी पर जोर
संखाचिल दैनिक समाचार पत्र और रेमेक्स वेलफेयर ट्रस्ट की संयुक्त पहल को मीडिया, शिक्षा और सामाजिक संगठनों के सहयोग से जलवायु जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सरकारी नीतियों और बुनियादी ढांचे के साथ-साथ जागरूक और तैयार समाज का निर्माण भी जरूरी है। खासकर बच्चों और युवाओं को इस प्रक्रिया से जोड़कर भविष्य में जलवायु चुनौतियों का सामना करने की सामुदायिक क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
आयोजक संस्थाओं ने भविष्य में अधिक स्कूलों, शैक्षणिक संस्थानों, ग्रामीण इलाकों और जलवायु-संवेदनशील समुदायों तक इस तरह के कार्यक्रम पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई। सुंदरबन में आयोजित यह पहल जलवायु शिक्षा को जमीनी स्तर तक ले जाने और बच्चों को भविष्य की पर्यावरणीय चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई।






























