कोलकाता : 30 की उम्र के बाद कई लोग यह मान लेते हैं कि कम उम्र होने के कारण उनका दिल हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट के लिए पूरी तरह तैयार है। लेकिन केवल उम्र या बाहर से फिट दिखना इस बात की गारंटी नहीं है कि शरीर लंबे समय तक भारी शारीरिक दबाव सहने के लिए तैयार है। HYROX जैसे वर्कआउट में रनिंग, स्ट्रेंथ एक्सरसाइज और लंबे समय तक लगातार मेहनत शामिल होती है, जिससे हृदय और पूरे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम पर काफी दबाव पड़ सकता है।
ऐसे में हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग शुरू करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति को समझना जरूरी है। डॉ. रजत कर, कंसल्टेंट, एडल्ट कार्डियोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल हावड़ा, के अनुसार, केवल उम्र या फिटनेस के आधार पर यह मान लेना उचित नहीं है कि व्यक्ति का हृदय हर तरह की कठिन ट्रेनिंग के लिए तैयार है।
सबसे पहले कराएं बेसिक हार्ट चेक-अप
अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से एक्सरसाइज नहीं कर रहा है, पहली बार हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग शुरू करने जा रहा है या परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा है, तो बेसिक कार्डियोवैस्कुलर चेक-अप उपयोगी हो सकता है।
इसमें आम तौर पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसे महत्वपूर्ण जोखिम कारकों की जांच शामिल हो सकती है। डॉक्टर व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री और लाइफस्टाइल को भी देखते हैं।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
वर्कआउट के दौरान शरीर द्वारा दिए जाने वाले संकेतों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। खासतौर पर अगर एक्सरसाइज करते समय सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना, दिल की धड़कन तेज या अनियमित महसूस होना या असामान्य रूप से ज्यादा थकान हो, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐसे लक्षण सामने आने पर ट्रेनिंग जारी रखने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
ECG, Echo और Stress Test कब जरूरी हो सकते हैं?
हर व्यक्ति को हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग शुरू करने से पहले ECG, Echocardiogram या Stress Test कराने की जरूरत नहीं होती। इन जांचों का फैसला व्यक्ति के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री, जोखिम कारकों और प्रस्तावित ट्रेनिंग की तीव्रता के आधार पर डॉक्टर कर सकते हैं।
ECG हृदय की इलेक्ट्रिकल गतिविधि से जुड़ी जानकारी देता है, जबकि Echocardiogram हृदय की संरचना और उसके काम करने की क्षमता का आकलन करने में मदद करता है। वहीं Stress Test व्यायाम या शारीरिक दबाव के दौरान हृदय की प्रतिक्रिया को देखने में मदद कर सकता है।
ट्रेनिंग की शुरुआत धीरे-धीरे करें
HYROX जैसी हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग में सीधे अधिकतम क्षमता तक पहुंचने के बजाय धीरे-धीरे इंटेंसिटी बढ़ाना बेहतर है। शरीर को पर्याप्त रिकवरी टाइम देना भी ट्रेनिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
फिटनेस का आकलन केवल इस आधार पर नहीं करना चाहिए कि कोई व्यक्ति कितना वजन उठा सकता है या कितनी जल्दी अपना वर्कआउट पूरा कर सकता है। शरीर की क्षमता और उसकी सीमाओं को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
फिटनेस के साथ दिल की सेहत को भी दें प्राथमिकता
हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग से फिटनेस और सहनशक्ति बेहतर हो सकती है, लेकिन हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग होती है। इसलिए उम्र को अपनी फिटनेस का एकमात्र पैमाना मानने के बजाय स्वास्थ्य स्थिति, जोखिम कारकों और शरीर के संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है।
विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार जांच कराना, ट्रेनिंग की तीव्रता धीरे-धीरे बढ़ाना और चेतावनी वाले लक्षणों को नजरअंदाज न करना हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग को सुरक्षित तरीके से अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।































