हुमायूं कबीर ने कहा कि वह अब पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि भारत में भी नहीं रहना चाहते।
रेजिनगर : पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की रेजिनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में करारी हार के बाद आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और नौदा के विधायक हुमायूं कबीर ने देश छोड़कर दुबई में बसने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक संघर्ष से थक चुके हैं और अब जीवन के बाकी दिन शांति से बिताना चाहते हैं। हालांकि, भारत छोड़ने से पहले उन्होंने मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद का निर्माण पूरा करने का संकल्प दोहराया है।
दुबई में गोल्डन वीजा लेकर रहने की योजना
हुमायूं कबीर ने कहा कि वह अब पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि भारत में भी नहीं रहना चाहते। उनकी योजना दुबई में गोल्डन वीजा लेकर स्थायी रूप से रहने की है। उन्होंने कहा कि वह वहां शांति से समय बिताना चाहते हैं, घूमना-फिरना चाहते हैं और जीवन के अंतिम दिन सुकून से गुजारना चाहते हैं।
हुमायूं कबीर ने कहा, “मैं बचपन से अन्याय बर्दाश्त नहीं करता आया हूं। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए बड़ा हुआ हूं। अब मेरी उम्र 64 साल है और 29 तारीख को मैं 65 वर्ष का हो जाऊंगा। जीवन के आखिरी दिन दुबई में शांति से बिताना चाहता हूं।”
उन्होंने यह भी इच्छा जताई कि मृत्यु के बाद उन्हें दुबई में ही दफनाया जाए। उनके मुताबिक, लगातार राजनीतिक संघर्ष और मौजूदा व्यवस्था से वह मानसिक रूप से थक चुके हैं।
रेजिनगर में 75 हजार से अधिक वोटों के अंतर से पीछे
विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर ने रेजिनगर सीट पर 58 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। लेकिन उपचुनाव में उनकी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। इस बार पार्टी की ओर से उनके बेटे गुलाम नबी आजाद चुनाव मैदान में थे। उपलब्ध चुनावी रुझानों के मुताबिक, भाजपा उम्मीदवार 75 हजार से अधिक वोटों के अंतर से आगे रहे, जबकि हुमायूं कबीर की पार्टी दूसरे स्थान पर रही।
चुनाव के बाद हुमायूं कबीर ने अपने बेटे को भी ‘गद्दार’ कहा था। अब उपचुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद उन्होंने राजनीति से दूरी बनाने और देश छोड़ने का फैसला सार्वजनिक किया है।
पुलिस और प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
उपचुनाव को लेकर हुमायूं कबीर ने राज्य प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि रेजिनगर विधानसभा सीट पर कब्जा करने के लिए सत्तारूढ़ दल ने पिछले दो महीनों से सत्ता का इस्तेमाल किया।
उनका दावा है कि इस अवधि में पुलिस ने उनके समर्थकों और पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं समेत कम से कम 64 लोगों को उनके घरों से उठाया। उन्होंने मारपीट, घरों में तोड़फोड़ और झूठे मामलों में फंसाने के भी आरोप लगाए। हुमायूं कबीर के मुताबिक, वर्ष 2022 के पुराने मामलों को भी दोबारा उठाकर उन्हें और उनके समर्थकों को निशाना बनाया गया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में प्रशासन या पुलिस का पक्ष सामने आने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।
बाबरी मस्जिद का निर्माण पूरा करना चाहते हैं हुमायूं
देश छोड़ने से पहले हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद का निर्माण पूरा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के प्रति उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की है और निर्माण कार्य पूरा किए बिना दुबई नहीं जाएंगे।
उन्होंने कहा, “मस्जिद का काम पूरा करके ही जाऊंगा। उसके बाद अगर जीवित रहा, तो दुबई चला जाऊंगा। इस मस्जिद के प्रति अपनी जिम्मेदारी मैंने खुद ली है और सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा की है। बंगाल के लोगों और मुस्लिम भाइयों के सहयोग से काम आगे बढ़ रहा है।”
मस्जिद के लिए मिले चंदे पर क्या बोले?
मस्जिद निर्माण के लिए मिले चंदे को लेकर हुए विवाद पर हुमायूं कबीर ने दावा किया कि आम लोगों से अब तक मिली आर्थिक सहायता की राशि 10 करोड़ रुपये से कम है। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए जमीन की व्यवस्था, नक्शा और अनुमानित लागत से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है तथा निर्माण पर दो करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना के लिए 500 करोड़ या 700 करोड़ रुपये जुटाए जाने की बातें निराधार हैं। हालांकि, चंदे और खर्च से जुड़े इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
हुमायूं कबीर ने साफ किया कि मस्जिद निर्माण का अपना वादा पूरा करने के बाद वह राजनीति से विदाई लेकर दुबई में बसने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। रेजिनगर उपचुनाव में हार के बाद उनका यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।































