कोलकाता में भी बढ़ सकती है होम बायर्स की चिंता
कोलकाता : देश के सात प्रमुख शहरों में घरों की कीमतें निर्माण लागत की तुलना में कहीं तेज रफ्तार से बढ़ी हैं। ANAROCK Research के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच औसत आवासीय निर्माण लागत में 34 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि इसी अवधि में घरों की औसत बिक्री कीमत यानी residential capital value 59 फीसदी बढ़ गई। इससे घर खरीदने वालों के लिए अफोर्डेबिलिटी का दबाव बढ़ा है।
कोलकाता भी देश के उन सात प्रमुख रियल एस्टेट बाजारों में शामिल है, जिनका इस तरह के आंकड़ों में विश्लेषण किया जाता है। 2026 की पहली तिमाही में कोलकाता में औसत आवासीय कीमत करीब ₹6,290 प्रति वर्ग फुट रही और सालाना आधार पर इसमें करीब 6 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई थी।
निर्माण लागत ₹2,681 से बढ़कर ₹3,604 प्रति वर्ग फुट
ANAROCK के अनुसार, सात प्रमुख शहरों में स्टैंडर्ड-प्लस आवासीय परियोजना की औसत निर्माण लागत 2021 में ₹2,681 प्रति वर्ग फुट थी, जो 2025 में बढ़कर ₹3,604 प्रति वर्ग फुट हो गई। यानी करीब 34 फीसदी की वृद्धि।
इसके मुकाबले आवासीय संपत्तियों की औसत बिक्री कीमत ₹5,826 से बढ़कर ₹9,260 प्रति वर्ग फुट हो गई। यह करीब 59 फीसदी की बढ़ोतरी है।
यानी घरों की कीमत बढ़ने के पीछे सिर्फ सीमेंट, स्टील और मजदूरी की बढ़ती लागत जिम्मेदार नहीं है। जमीन की कीमत, डेवलपर मार्जिन और मांग-आपूर्ति का संतुलन भी बड़ी भूमिका निभा रहा है।
कोलकाता में जमीन की कीमत अहम फैक्टर
कोलकाता जैसे स्थापित महानगर में जमीन की उपलब्धता और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े विकास का असर रियल एस्टेट कीमतों पर पड़ता है। रिपोर्ट के मुताबिक, सात प्रमुख शहरों में 2021 से H1 2026 के बीच कई इलाकों में जमीन की कीमतों में 50 से 120 फीसदी तक वृद्धि देखी गई।
इसका सीधा असर नए प्रोजेक्ट्स की लागत और अंततः खरीदारों द्वारा चुकाई जाने वाली कीमत पर पड़ सकता है।
स्टील और लॉजिस्टिक्स की लागत में तेज उछाल
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण निर्माण से जुड़े कुछ खर्चों पर अतिरिक्त दबाव आया है। स्टील की कीमतों में करीब 20 फीसदी और फ्यूल व साइट लॉजिस्टिक्स की लागत में करीब 15-20 फीसदी तक वृद्धि बताई गई है।
फिनिशिंग मटेरियल जैसे टाइल्स, ग्लास और हार्डवेयर की लागत में भी करीब 8-12 फीसदी की वृद्धि हुई है। वहीं MEP यानी इलेक्ट्रिकल, प्लंबिंग और HVAC से जुड़े खर्चों में करीब 9-13 फीसदी का इजाफा हुआ है।
कोलकाता के होम बायर्स पर क्या असर?
निर्माण और जमीन की लागत बढ़ने का सबसे बड़ा असर मिडिल-क्लास और अफोर्डेबल हाउसिंग खरीदारों पर पड़ सकता है। प्रीमियम और लग्जरी प्रोजेक्ट्स में डेवलपर्स बढ़ी लागत को कीमतों में शामिल कर सकते हैं, लेकिन मिड-इनकम सेगमेंट में कीमत बढ़ाने की गुंजाइश सीमित रहती है।
ऐसे में कोलकाता में भी डेवलपर्स को प्रोजेक्ट की लागत, लोकेशन और खरीदारों की भुगतान क्षमता के बीच संतुलन बनाना पड़ सकता है।
डेवलपर्स के मार्जिन पर भी दबाव
पहले से लॉन्च और बिक चुके प्रोजेक्ट्स में बढ़ी हुई निर्माण लागत को खरीदारों पर डालना मुश्किल होता है। इससे डेवलपर्स के मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है। नए प्रोजेक्ट्स में हालांकि कीमतों को मौजूदा बाजार परिस्थितियों के अनुसार तय करने की गुंजाइश अधिक रहती है। ANAROCK के आंकड़ों का संकेत साफ है—भारत के बड़े शहरों में घर सिर्फ महंगे नहीं हो रहे, बल्कि जमीन और निर्माण लागत के बढ़ते अंतर के कारण अफोर्डेबल हाउसिंग की चुनौती भी गहरी हो रही है। कोलकाता के खरीदारों के लिए आने वाले समय में लोकेशन, कनेक्टिविटी और बजट के बीच संतुलन और भी महत्वपूर्ण हो सकता है।






























