डेढ़ दशक बाद हल्दिया में फिर लहराया ‘ रेड फ्लैग ’
कोलकाता : हल्दिया में करीब डेढ़ दशक बाद वामपंथी ट्रेड यूनियन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने विश्वकर्मा पूजा आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। पूजा की अनुमति को लेकर पुलिस के साथ विवाद के बाद मामला कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचा, जहां मंगलवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने पुलिस को दिन खत्म होने से पहले आवश्यक अनुमति देने का निर्देश दिया।
पोर्ट अधिकारियों से अनुमति, पुलिस पर रोक का आरोप
पूजा का आयोजन CITU से संबद्ध ‘हल्दिया रिफाइनरी वर्कर्स एंड एम्प्लॉइज विश्वकर्मा फेस्टिवल कमिटी’ कर रही है। आयोजकों के मुताबिक, उन्होंने हल्दिया पोर्ट पर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के गेट के पास पूजा के लिए पोर्ट अधिकारियों से अनुमति ले ली थी। हालांकि, उनका आरोप था कि पुलिस की ओर से आवश्यक मंजूरी नहीं दी जा रही थी।
इसके बाद CITU ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस को आवश्यक अनुमति देने का निर्देश दिया।
CPM नेता सायन बनर्जी ने सरकार पर साधा निशाना
CITU की ओर से युवा CPM नेता और वकील सायन बनर्जी ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार वामपंथी दलों को विश्वकर्मा पूजा के दौरान अंजलि देने के लिए आमंत्रित कर रही है, जबकि दूसरी ओर पुलिस ही पूजा आयोजित करने की अनुमति नहीं दे रही थी।
सायन बनर्जी ने इसे विरोधाभास बताते हुए कहा कि संविधान हर नागरिक को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-पाठ करने का अधिकार देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस अधिकार की रक्षा के लिए भी संगठन को अदालत का रुख क्यों करना पड़ा।
2011 के बाद पहली बार फिर आयोजन की कोशिश
CITU का कहना है कि हल्दिया में 2011 से पहले विश्वकर्मा पूजा नियमित रूप से आयोजित होती थी। वाममोर्चा शासन के दौरान CITU की पहल पर विभिन्न कारखानों, श्रमिक क्षेत्रों और रिक्शा-ऑटो स्टैंड पर विश्वकर्मा पूजा बड़े स्तर पर मनाई जाती थी।
हल्दिया में भी CPM के तत्कालीन प्रभावशाली नेता लक्ष्मण सेठ की देखरेख में ट्रेड यूनियन की ओर से बड़े आयोजन किए जाते थे। लेकिन 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद धीरे-धीरे यह परंपरा कमजोर पड़ गई और पूजा का आयोजन बंद हो गया।
‘रेड फ्लैग’ के साथ वापसी की कोशिश
करीब 15 साल बाद CITU अब हल्दिया में विश्वकर्मा पूजा को दोबारा शुरू करने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में जब इलाके में वामपंथी संगठन का पुराना प्रभाव काफी कमजोर हो चुका है, यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसे श्रमिक राजनीति और संगठन के पुराने आधार को फिर से सक्रिय करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद अब CITU कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह है। लंबे अंतराल के बाद हल्दिया में विश्वकर्मा पूजा के जरिए ‘रेड फ्लैग’ के साथ वामपंथी ट्रेड यूनियन की राजनीतिक-संगठनात्मक मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश साफ दिखाई दे
































