गुंडा दमन कानून सोमवार 13 जुलाई से हो जायेगा लागू
कोलकाता : पब्लिक आर्डर बिल यानि गुंडा दमन बिल 26 जून को विधानसभा में पेश हुआ था। अब यह अगले सोमवार यानि 13 जुलाई से कानून का रूप ले लेगा। रेल लाइन उखाड़ने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने आदि कई मामलों में यह कानून काम करेगा। अगर ऐस लगे कि किसी से राज्य या देश को खतरा है तो उस व्यक्ति को हिरासत में रखा जा सकता है। कुल मिला कर गुंडई करने वालों की अब खैर नहीं है।
उदहारण के रूप में विधानसभा में अग्निमित्र पल ने 26 जून को विधानसभा में कहा था कि बेलडांगा के एक निवासी की झारखण्ड में अस्वभाविक मौत हुई थी। इस मौत को सांप्रदायिक रूप दिया गया। तांडव मचाया गया। बाद में पता चला कि उसने आत्महत्या की थी। एक मौत का कारण तय होने से पहले कानून अपने हाथ में लेने वालों की ज़िम्मेदारी सरकार क्यों लेगी। उन्होंने कहा था कि पिछली सरकार के राज में पुलिस फ़ाइल माथे पे रख टेबल के अंदर छुपी थी। मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि आंदोलन का अधिकार बिल्कुल है लेकिन सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने पर आर्थिक भार खुद वहन करना होगा।
कमीशन सोचेगा कि कितना नुकसान हुआ। कमीशन ही आंकलन करेगा और सजा तय करेगा। उकसाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। हिंसात्मक बयान देने वालों पर करवाई की जाएगी। यह कोई राजनीतिक प्रतिहिंसा नहीं है । क़ानून की आँखों में सब समान है। पश्चिम बंगाल में कानून तोड़ने के पहले अपराधी दस बार सोचेंगे। यह बिल निरपराध लोगों के खिलाफ नहीं है । हम डर दिखाने नहीं, प्रतिहिंसा नहीं, जवाबदेही प्रतिष्ठित करने आये हैं। कानून का शासन कायम करने आये हैं।
पब्लिक आर्डर बिल यानी गुंडा दमन बिल 26 जून को विधानसभा में पेश हुआ था। राज्य के कैबिनेट मंत्री शंकर घोष ने कहा था कि ऐतिहासिक बिल पेश हुआ है सदन में। दुर्भाग्य से जो हमें अनुशासन सिखाने आये, उन्होंने सरकारी संपत्ति की ख़ुद तोड़फोड़ की है। यह मानसिकता किसी समाज का हिस्सा नहीं, इस मानसिकता को समाज से हटाना होगा. CAA और वक्फ आंदोलन के नाम पर राज्य में अत्याचार और टैक्स पेयर्स के रुपये बर्बाद करने का अधिकार किसी को नहीं है ।हमने मोथाबाड़ी और मालदह में देखा कि किस तरह सरकारी संपत्ति लूटी गयी। जो बिल का विरोध कर रहे वो उस अंश के लोग हैं जों चाहते हैं कि समाज में वैसा ही अत्याचार होता रहे। गुंडा बदमाश सिंडिकेट जो करते हैं, उस राज्य के ऐसी मानसिकता वाले लोग पोलिटिकल गुंडा हैं । आज ये बिल उसी के ख़िलाफ़ तथा गुंडई रोकने के लिए पेश किया गया है। बिल की सच में आवश्यकता थी। गैंग कल्चर और सिंडिकेट कल्चर को रोकने के लिए यह बिल है।
सरकार का उद्देश्य है—
- संगठित अपराध खत्म करना
- सिंडिकेट राज रोकना
- रंगदारी और अवैध वसूली पर कार्रवाई
- हिंसक प्रदर्शन से सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा
- आम लोगों में सुरक्षा का माहौल बनाना
सबसे बड़ा प्रावधान – बिना ट्रायल 12 महीने तक हिरासत |
यदि जिला प्रशासन या पुलिस कमिश्नर को लगता है कि कोई व्यक्ति सार्वजनिक शांति या सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है, तो उसे बिना नियमित मुकदमे के अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है।
सरकार का तर्क है कि इससे बड़े अपराध होने से पहले ही अपराधियों पर रोक लगाई जा सकेगी। हालांकि आलोचकों का कहना है कि इस प्रावधान का दुरुपयोग भी संभव है, इसलिए इसकी संवैधानिक वैधता और न्यायिक समीक्षा पर भी नजर रहेगी।






























