जितेंद्र सिंह बोले—प्रोजेक्ट प्लानिंग के पहले चरण से ही कमर्शियल पार्टनर को जोड़ें; कॉमन R&D प्लेटफॉर्म बनाने पर दिया जोर
कोलकाता : टेक्नोलॉजी को लैब से बाजार तक तेजी से पहुंचाने के लिए रिसर्च संस्थानों और इंडस्ट्री के बीच सहयोग को शुरुआती चरण से ही मजबूत करने की जरूरत है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि “कमर्शियल विंग को पहले दिन से ही लैब के साथ मिलकर काम करना चाहिए।”
कोलकाता स्थित CSIR-IICB में आयोजित छठे RISE कॉन्क्लेव में इंडस्ट्री के CEO, CSO और COO के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के मौजूदा मॉडल में बदलाव की जरूरत बताई।
शुरुआत से जुड़े कमर्शियल पार्टनर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि संभावित कमर्शियल पार्टनर की पहचान प्रोजेक्ट शुरू होने के समय ही कर ली जानी चाहिए। इससे टेक्नोलॉजी तैयार करते वक्त ही बाजार की जरूरत, डिजाइन, सप्लाई चेन, पर्यावरणीय टिकाऊपन और व्यावसायिक व्यवहार्यता जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी बाजार में पहुंचने के बाद यह पता चलना उचित नहीं है कि वास्तविक उपयोगकर्ता की जरूरत पूरी करने के लिए उसमें बदलाव करना पड़े।
जरूरी मिनरल्स पर इंडस्ट्री की नजर
कॉन्क्लेव में क्रिटिकल मिनरल्स और स्वदेशी टेक्नोलॉजी प्रमुख चर्चा के विषय रहे। इंडस्ट्री प्रतिनिधियों ने रेयर-अर्थ एक्सट्रैक्शन, परमानेंट मैग्नेट, रीसाइक्लिंग, लिथियम बेनिफिशिएशन तथा वैनेडियम और टाइटेनियम जैसे रणनीतिक मिनरल्स की रिकवरी से जुड़ी तकनीकों पर चर्चा की।
प्रतिनिधियों ने इन तकनीकों को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए CSIR की प्रयोगशालाओं से तकनीकी सहयोग मांगा। पूर्वी भारत में रेयर-अर्थ और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।
फाउंड्री सेक्टर के लिए कॉमन R&D प्लेटफॉर्म
मंत्री ने फाउंड्री सेक्टर के लिए इंडस्ट्री-लीड कॉमन R&D सुविधा बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री अपनी जरूरतें सामने रखे और सरकार उसके लिए आवश्यक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने में सहयोग करेगी।
उन्होंने स्टील उद्योग की कंपनियों से सामूहिक रूप से आगे आने का आग्रह करते हुए कहा कि सरकार उद्योग की जरूरत के मुताबिक R&D प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।
स्पेस टेक्नोलॉजी पर भी चर्चा
बैठक में स्पेस टेक्नोलॉजी और विशेष रूप से ऑप्टिकल कंपोनेंट्स से जुड़े मुद्दे भी उठे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने संबंधित जानकारी मांगी और संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर इन मामलों को डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस के समक्ष उठाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि उद्योग के लिए नियमों को आसान बनाने की प्रक्रिया पहले से जारी है और इंडस्ट्री से इस दिशा में नए सुझाव देने को कहा।
एंटी-स्नेक वेनम के घरेलू उत्पादन पर चर्चा
बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स ने देश में एंटी-स्नेक वेनम के घरेलू उत्पादन को फिर से शुरू करने की संभावना पर चर्चा की। कंपनी ने बताया कि पूर्वी भारत में सांपों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं और इस क्षेत्र की जरूरतें अलग हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कंपनी को पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर आगे बढ़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल वैज्ञानिक मानकों और जनस्वास्थ्य की जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए।
नए एंटीवेनम समाधान पर स्टार्टअप का प्रस्ताव
सांप के काटने के लिए जिम्मेदार प्रजातियों की पहचान और नए एंटीवेनम समाधान से जुड़ी तकनीक विकसित करने वाले एक स्टार्टअप ने भी अपनी पहल प्रस्तुत की।
मंत्री ने इनोवेशन का स्वागत किया, लेकिन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से पहले वैज्ञानिक सत्यापन और क्लिनिकल ट्रायल की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों की सुरक्षा से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता।
सरकार ने कहा—जरूरत बताइए, समाधान पर काम होगा
बातचीत के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने इंडस्ट्री प्रतिनिधियों से सामान्य चर्चाओं के बजाय ठोस और अमल में लाई जा सकने वाली जरूरतों को सामने रखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि सरकार और वैज्ञानिक संस्थान इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप आवश्यक तालमेल बनाने में मदद करेंगे। साथ ही उन्होंने उद्योग जगत से कहा कि उन्हें सुझाव देने के लिए किसी औपचारिक कार्यक्रम का इंतजार करने की जरूरत नहीं है।
छठे RISE कॉन्क्लेव से यह संदेश स्पष्ट हुआ कि भारत के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए R&D की शुरुआत से ही इंडस्ट्री को साझेदार बनाना होगा। वैज्ञानिक संस्थान टेक्नोलॉजी को सक्षम बनाने और सरकार उसे लैब से बाजार तथा व्यापक सामाजिक उपयोग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।






























