ममता को मिला ‘ फुटबॉल खिलाड़ी ’, ऋतब्रत गुट को ‘ लिफाफा ’
कोलकाता : पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों—नंदीग्राम और रेजिनगर में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले चुनाव चिह्नों को लेकर बड़ा बदलाव हुआ है। चुनाव आयोग ने इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के नौशाद सिद्दीकी को ‘अलमारी’ चुनाव चिह्न दिया है, जबकि हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (AUJP) को ‘टेबल’ चिह्न आवंटित किया गया है। वहीं, ‘लिफाफा’ चिह्न अब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को मिला है।
दो बार ‘ लिफाफा ’ लेकर जीते थे नौशाद
नौशाद सिद्दीकी भांगड़ विधानसभा सीट से ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न पर दो बार चुनाव जीत चुके हैं। 2021 में ISF ने इसी चिह्न के साथ विधानसभा चुनाव लड़ा था। इसके बाद पंचायत और लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने इसी प्रतीक का इस्तेमाल किया।
ISF की स्थापना 21 फरवरी 2021 को हुई थी। पार्टी की स्थापना फुरफुरा शरीफ के अब्बास सिद्दीकी ने की थी, जबकि उनके छोटे भाई नौशाद सिद्दीकी पार्टी के प्रमुख चुनावी चेहरा रहे हैं। 2021 में वाम मोर्चा और कांग्रेस के साथ संयुक्त मोर्चे के तहत चुनाव लड़ते हुए ISF ने भांगड़ सीट जीती थी। 2026 के विधानसभा चुनाव में भी नौशाद भांगड़ से विजयी हुए।
‘ लिफाफा ’ वापस लेने के लिए हाई कोर्ट जाएंगे नौशाद
उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने ‘लिफाफा’ चिह्न डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को आवंटित कर दिया। इसके बाद ISF को ‘अलमारी’ चिह्न मिला है।
नौशाद ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पुराने चिह्न की मांग की है। उन्होंने कहा है कि वह इस मामले को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख करेंगे। उनका आरोप है कि जिस पार्टी का पहले अस्तित्व नहीं था, उसे अचानक मान्यता मिल गई और उसका चिह्न भी उनकी पार्टी को नहीं दिया गया।
हुमायूं की ‘ बांसुरी ’ भी गई, मिला ‘ टेबल ’
दूसरी ओर, हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी को भी चुनाव आयोग ने नया चुनाव चिह्न दिया है। 2026 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ‘बांसुरी’ चिह्न के साथ मैदान में उतरी थी। अब उपचुनाव के लिए उसे ‘टेबल’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
हुमायूं कबीर ने पिछले विधानसभा चुनाव में रेजीनगर और नॉदा दोनों सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों जगह जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ दी। अब उनके बेटे गुलाम नबी आजाद इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इसी वजह से रेजीनगर में उपचुनाव हो रहा है।
तृणमूल के पुराने चिह्न पर भी रोक
इस बीच तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद के कारण चुनाव आयोग ने पार्टी के पारंपरिक ‘जोड़ाफूल’ यानी ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न तथा ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी है। दोनों गुटों को उपचुनाव के लिए अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए गए हैं।
ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न मिला है। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिह्न दिया गया है। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम तौर पर लागू रहेगी।
एक ही फैसले से कई दलों के चिह्न बदले
इस तरह 6 अक्टूबर के उपचुनाव से पहले चुनावी मैदान में कई दलों की पहचान बदल गई है। नौशाद सिद्दीकी की ISF अब ‘लिफाफा’ के बजाय ‘अलमारी’ चिह्न पर चुनाव लड़ेगी। हुमायूं कबीर की पार्टी ‘बांसुरी’ के बजाय ‘टेबल’ चिह्न के साथ मैदान में होगी। वहीं ऋतब्रत गुट को वही ‘लिफाफा’ चिह्न मिला है, जिसका इस्तेमाल ISF लंबे समय से करती रही थी।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव में अब उम्मीदवारों के साथ-साथ चुनाव चिह्न भी मुकाबले का अहम हिस्सा बन गए हैं। तृणमूल के नाम और पुराने चिह्न को लेकर कानूनी विवाद भी जारी है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।






























