सीजेपी अब भी अडिग !
नई दिल्ली – केंद्र ‘ककरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के साथ बातचीत करना चाहता है। सीजेपी भी बातचीत चाहती है। लेकिन वह बातचीत अभी भी ठप पड़ी है। दावा किया जा रहा है कि इसके पीछे आंदोलनकारियों की दो पूर्वशर्तें हैं। प्रदर्शनकारी उन दोनों शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। केंद्र भी उन शर्तों को मानने के लिए राजी नहीं है। इसकी वजह से पूरा मामला उलझा हुआ है।
क्या है स्थिति
सीजेपी की प्रमुख मांगों में से एक है— केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। आंदोलनकारियों के समर्थन में अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने भी यही मांग उठाई थी। सरकारी सूत्रों ने बताया है कि सोनम धर्मेंद्र के इस्तीफे की मांग से पीछे हट गए हैं। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। सोनम के नए रुख के कारण गतिरोध समाप्त होने की एक संभावना बनी थी। लेकिन सीजेपी अब भी अपने रुख पर अडिग है।
सरकार शर्त मानने को तैयार नहीं
बातचीत शुरू होने से पहले सीजेपी के प्रतिनिधियों ने एक बार फिर दो पूर्वशर्तों पर ज़ोर दिया। पहली, धर्मेंद्र का इस्तीफ़ा। दूसरी, केंद्र के साथ जो भी बातचीत हो— वह पूरी तरह जंतर-मंतर में ही होनी चाहिए। सीजेपी चाहती है कि बातचीत खुले तौर पर हो। केंद्र सीजेपी की इन दोनों मांगों में से किसी को भी मानने के लिए तैयार नहीं है। नतीजतन, बातचीत को लेकर गतिरोध पैदा हो गया है।
मध्य मार्ग की तलाश
ऐसे में गतिरोध दूर करने के लिए केंद्र ने सीजेपी के साथ संपर्क का रास्ता खुला रखा है। औपचारिक बातचीत का मार्ग प्रशस्त करने के लिए किसी मध्य मार्ग की तलाश भी की जा रही है।






























