जस्टिस देबांग्शु बसाक की डिवीजन बेंच ने कमेटी को बस टर्मिनस शिफ्ट करने का तरीका तय करने और निर्धारित समय के भीतर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
कोलकाता : धर्मतला यानी एस्प्लेनेड बस टर्मिनस को हटाकर हावड़ा शिफ्ट करने का मामला करीब 19 साल बाद भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। अब कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है। जस्टिस देबांग्शु बसाक की डिवीजन बेंच ने कमेटी को बस टर्मिनस शिफ्ट करने का तरीका तय करने और निर्धारित समय के भीतर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बनेगी कमेटी
हाई कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, कमेटी की अध्यक्षता राज्य के चीफ सेक्रेटरी करेंगे। इसमें राज्य के एडवोकेट जनरल, परिवहन और पर्यावरण विभाग के अधिकारी तथा याचिकाकर्ता भी शामिल होंगे।
कमेटी को धर्मतला बस टर्मिनस को हावड़ा ले जाने की योजना पर विचार करने के साथ-साथ बाबूघाट बस स्टैंड को धर्मतला में शिफ्ट करने के विकल्प पर भी विचार करना होगा। कोर्ट ने कमेटी से शिफ्टिंग की प्रक्रिया और उसके क्रियान्वयन का तरीका तय करने को कहा है।
2007 में हाई कोर्ट ने दिया था टर्मिनस हटाने का आदेश
धर्मतला बस टर्मिनस का मामला पुराना है। पर्यावरण कार्यकर्ता सुभाष दत्त ने वर्ष 2002 में मैदान इलाके में प्रदूषण और विक्टोरिया मेमोरियल जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
इस मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने 2007 में धर्मतला से बस टर्मिनस हटाने का आदेश दिया था। उस समय प्रशासन को छह महीने के भीतर टर्मिनस हटाने का निर्देश दिया गया था।
बाद में राज्य सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में छह महीने की समय-सीमा को हटा दिया, लेकिन धर्मतला से बस टर्मिनस हटाने के हाई कोर्ट के मूल आदेश को बरकरार रखा।
कई कमेटियां बनीं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं
कोर्ट के आदेश के बावजूद धर्मतला बस टर्मिनस का स्थायी स्थानांतरण नहीं हो सका। इस दौरान टर्मिनस को हटाने और वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने के लिए कई स्तरों पर कमेटियां बनाई गईं।
स्थायी जगह की कमी, परिवहन व्यवस्था और निजी बस ऑपरेटरों की सहमति जैसे मुद्दों के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब हाई कोर्ट ने एक बार फिर इस मामले को उच्च स्तर पर सुलझाने की पहल की है।
जोका-एस्प्लेनेड मेट्रो प्रोजेक्ट से बदले हालात
इस मामले में जोका-एस्प्लेनेड मेट्रो यानी पर्पल लाइन का काम भी महत्वपूर्ण हो गया है। मेट्रो निर्माण के लिए पुराने L-20 टर्मिनस वाले इलाके में काम शुरू होने के बाद बसों की वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी है।
राज्य सरकार ने हाल में कर्जन पार्क में करीब 3,224 वर्ग मीटर क्षेत्र में नया बस इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है। फिलहाल दक्षिण बंगाल और उत्तर बंगाल राज्य परिवहन निगम की लंबी दूरी की कुछ बसों को वहां स्थानांतरित किया गया है।
हावड़ा में मल्टी-लेवल टर्मिनस पर जोर
हाई कोर्ट का जोर अब धर्मतला और मैदान इलाके में बसों की भीड़ तथा पार्किंग को कम करने पर है। कोर्ट की ओर से हावड़ा में स्थायी मल्टी-लेवल बस टर्मिनस विकसित करने के विकल्प पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
इसका उद्देश्य मैदान क्षेत्र में बसों की पार्किंग और उससे होने वाले प्रदूषण को कम करना है। अब मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी को शिफ्टिंग की व्यवहारिक योजना तैयार करनी होगी और कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
धर्मतला बस टर्मिनस को लेकर 2007 में दिए गए आदेश के करीब दो दशक बाद यह मामला एक बार फिर हाई कोर्ट की निगरानी में आ गया है।
































