तीन महीने में देनी होगी रिपोर्ट
कोलकाता : दुर्गापूजा के दौरान कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा मंडप में भगदड़ और कुचलने की घटना में 19 लोगों की मौत के मामले की जांच के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश अनिंदिता राय सरस्वती के नेतृत्व में छह सदस्यीय टीम बनाई गई है। इस टीम को हादसे के कारणों, सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक और घटना के दौरान बने हालात की विस्तृत जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
सरकार ने SIT को तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। जांच में कोलकाता पुलिस की भूमिका, पूजा मंडप की सुरक्षा व्यवस्था और वहां मौजूद लोगों की संख्या जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद बनाई गई जांच टीम
चोरबागान हादसे ने कोलकाता में दुर्गापूजा के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में 19 लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घटना की निष्पक्ष जांच के लिए न्यायिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति के नेतृत्व में जांच व्यवस्था बनाने की बात कही थी।
इसके बाद मंगलवार को राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। अदालत ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में जांच आयोग गठित करने का निर्देश दिया। इसी क्रम में राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश अनिंदिता राय सरस्वती की अगुवाई में छह सदस्यीय SIT गठित की है।
छह सदस्यीय SIT में कौन-कौन शामिल?
राज्य सरकार की अधिसूचना के मुताबिक, जांच दल में आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा विभाग के सचिव, स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के डीजी और आईजी शामिल हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) का एक सदस्य, गृह विभाग का एक प्रतिनिधि और राज्य पुलिस महानिदेशक का एक प्रतिनिधि भी टीम का हिस्सा होंगे।
SIT का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि चोरबागान मंडप में हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी। टीम को घटना से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करने का निर्देश दिया गया है।
भीड़ कितनी थी और हादसा कैसे हुआ?
जांच दल यह पता लगाएगा कि घटना किस समय और मंडप के किस हिस्से में हुई थी। इसके साथ ही मंडप की अधिकतम क्षमता कितनी थी और हादसे के समय वहां निर्धारित सीमा से अधिक लोग मौजूद थे या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी।
घटना के बाद सामने आए अलग-अलग दावों की भी पड़ताल होगी। कुछ दावों में बारिश को हादसे की वजह बताया गया है। वहीं, घटना वाले दिन मंडप के ढहने की अफवाह फैलने की बात भी सामने आई थी। SIT इन परिस्थितियों और अफवाहों की भूमिका की जांच करेगी, ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
कोलकाता पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के दायरे में
राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार, चोरबागान मंडप में सुरक्षा इंतजाम कैसे थे और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए गए थे, इसकी भी जांच होगी। कोलकाता पुलिस की भूमिका की समीक्षा भी SIT करेगी।
जांच दल यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि मौके पर भीड़ प्रबंधन के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं और आपात स्थिति में संबंधित एजेंसियों ने किस तरह काम किया। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे की कार्रवाई हो सकती है।
मुख्यमंत्री का सख्त रुख, अलग फैक्ट-फाइंडिंग टीम भी गठित
चोरबागान हादसे को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि घटना में जिम्मेदार पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
इस मामले में राज्य सरकार ने SIT के अलावा एक अलग फैक्ट-फाइंडिंग टीम भी गठित की है। इस अलग टीम में कोलकाता पुलिस और नगर निगम को शामिल नहीं किया गया है।
अब सभी की नजर SIT की जांच पर है। तीन महीने के भीतर आने वाली अंतिम रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि चोरबागान में हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, सुरक्षा व्यवस्था में कहां कमी रह गई और घटना के लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी बनती है।
































