कोलकाता के 26 स्कूलों में शुरू हुई जलवायु शिक्षा की पहल
कोलकाता : 2030 में दुनिया कैसी होगी? अगले कुछ वर्षों में 194 देशों में किस तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे? और 2050 तक हमारा कोलकाता किस रूप में बदल सकता है? इन्हीं सवालों को केंद्र में रखते हुए कोलकाता में पहली बार बड़े स्तर पर क्लाइमेट एजुकेशन यानी जलवायु शिक्षा को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
9 सितंबर को नेशनल हाई स्कूल, कोलकाता में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य अगली पीढ़ी को जलवायु परिवर्तन की वास्तविकता, उसके प्रभाव और भविष्य की चुनौतियों से परिचित कराना था। कार्यक्रम में इंटरनेशनल क्लाइमेट चेंज एक्सपर्ट और अनुभवी पत्रकार सौविक चोंगदार ने अपने विकसित किए गए क्लाइमेट एजुकेशन मॉडल पर विस्तार से चर्चा की।
26 स्कूलों के शिक्षक एक मंच पर
कोलकाता में पहली बार कोलकाता, हावड़ा और दक्षिण 24 परगना के 26 स्कूलों के शिक्षक जलवायु शिक्षा के इस मॉडल पर चर्चा करने के लिए एक साथ आए। कार्यक्रम में नेशनल हाई स्कूल की 100 से अधिक छात्राओं ने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।
सौविक चोंगदार ने छात्राओं के साथ सीधे संवाद करते हुए जलवायु परिवर्तन के कारणों और संभावित खतरों के साथ-साथ भविष्य के शहर को सुरक्षित रखने के उपायों पर भी चर्चा की। उन्होंने बच्चों को केवल समस्याओं के बारे में जानकारी देने के बजाय भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने और समाधान तलाशने पर जोर दिया।
2050 में कैसा होगा कोलकाता?
कार्यक्रम में कोलकाता में बारिश के दौरान होने वाले जल-जमाव, बदलते पर्यावरण, शहरी जीवन की चुनौतियों और वर्ष 2050 में शहर की संभावित स्थिति पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। बच्चों से यह जानने की कोशिश की गई कि वे अपने शहर के भविष्य को किस रूप में देखते हैं और उसे सुरक्षित एवं रहने योग्य बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
चर्चा में कॉलेज स्ट्रीट से धर्मतला और बेहला से खिदिरपुर तक फैले कोलकाता की उन चुनौतियों को भी सामने रखा गया, जिनका असर बारिश के दौरान सबसे अधिक दिखाई देता है। जल-जमाव और बदलते मौसम के बीच शहर को भविष्य के लिए तैयार करने की जरूरत पर विशेष जोर दिया गया।
‘बच्चों को डराना नहीं, तैयार करना है’
सौविक चोंगदार ने कहा कि उनका उद्देश्य दुनिया के भावी ‘योद्धाओं’ को लड़ने का रास्ता दिखाना है। उनके मुताबिक, बच्चों को जलवायु परिवर्तन के खतरों से डराना समाधान नहीं है। इसके बजाय उन्हें आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करना और सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करना जरूरी है।
सुंदरबन से शुरू हुई उनकी जलवायु शिक्षा पहल अब कोलकाता के स्कूलों तक पहुंच गई है। इस पहल के जरिए बच्चों को पर्यावरणीय समस्याओं को समझने के साथ-साथ उनके समाधान में अपनी भूमिका तलाशने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
350 स्कूलों तक पहुंचाने का लक्ष्य
इस क्लाइमेट एजुकेशन मॉडल को आने वाले समय में 350 स्कूलों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। कोलकाता में शुरू हुई यह पहल शिक्षकों और छात्रों को एक साथ जोड़कर जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस पहल का उद्देश्य केवल जलवायु परिवर्तन के बारे में जानकारी देना नहीं, बल्कि ऐसी पीढ़ी तैयार करना है जो भविष्य की पर्यावरणीय चुनौतियों को समझे, उनके समाधान में भागीदारी करे और 2050 के शहर को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने में अपनी भूमिका निभा सके।






























