दावा किया कि यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि ‘राज्य की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए नागरिकों का मार्च’ है।
कोलकाता : नीट प्रश्न पत्र के लीक होने के मामले को लेकर वामपंथी छात्र संगठन और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा निकाले गए जुलूस के बाद उत्पन्न अशांति राज्य की राजनीति का केंद्र बनी हुई है। इसी माहौल में भाजपा ने सोमवार को कोलकाता की सड़कों पर उतरकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान पार्टी ध्वज के बजाय उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज हाथ ले रखा था।
नागरिकों का मार्च बताया
भाजपा ने दावा किया कि यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि ‘राज्य की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए नागरिकों का मार्च’ है।
दो अलग-अलग जुलूस निकाले गए
कोलकाता में सोमवार को शहर के दो अलग-अलग हिस्सों से दो अलग-अलग जुलूस निकाले गए। उत्तर कोलकाता के सियालदह से शुरू हुआ जुलूस धर्मतला के डोरिना क्रॉसिंग तक गया। वहीं, दक्षिण कोलकाता में गोलपार्क से जादवपुर 8B बस स्टैंड तक जुलूस निकाला गया। भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक सुबह से ही दोनों स्थानों पर जमा होने लगे थे। जुलूस को राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से सजाया गया था। ढोल वादकों की थाप, देशभक्ति गीतों की धुन, सभी ने कार्यक्रम को एक उत्सवपूर्ण माहौल प्रदान किया।
उत्तर कोलकाता में कार्यक्रम का नेतृत्व भाजपा के उत्तर कोलकाता जिला अध्यक्ष तमोघन घोष ने किया। कार्यक्रम में राज्य के उद्योग मंत्री तापस रॉय, भाजपा नेता सजल घोष, शंकुदेव पांडा और कई अन्य नेता मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम पार्टी की पहचान से परे है और देश के लिए जनता की एकता का संदेश देता है।
जुलूस में कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ तीखा व्यंग्य किया गया। प्रतिभागियों के हाथों में तरह-तरह के बैनर थे। कहीं-कहीं ‘तिलचट्टे मारने की दवा’ भी प्रतीकात्मक रूप से लिखी हुई थी।
हिंसा लोकतंत्र के लिए चिंताजनक
भाजपा नेता सजल घोष ने कहा, “धर्मतला में आंदोलन के नाम पर हुई हिंसा लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक है। पत्रकारों पर हमले हुए हैं, पुलिस पर हमले हुए हैं। आज आम लोग देश के खिलाफ साजिश रचने वालों के विरोध में राष्ट्रीय ध्वज लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। यहां भाजपा या किसी अन्य पार्टी का सवाल नहीं है, सवाल देश का है।
विपक्ष पर हमला
मंत्री तापस रॉय ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले पर विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “देश के विभिन्न राज्यों में प्रश्नपत्र लीक होने के कई मामले सामने आए हैं। पश्चिम बंगाल में भी अतीत में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। अब इस मुद्दे को केवल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उछाला जा रहा है। यहां मुख्य उद्देश्य राजनीतिक लाभ है, आम जनता का हित नहीं।”
इस संदर्भ में, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को निशाना बनाते हुए तापस ने कहा, “पूरे देश में सबसे बड़ा भ्रष्टाचार पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के कार्यकाल के दौरान हुआ। 26,000 नौकरियां रद्द होने के बाद भी उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया। धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया, लेकिन ममता बनर्जी ने ऐसा नहीं किया। यही तृणमूल और भाजपा के बीच का अंतर है।”
दूसरी ओर, तमोघन घोष ने कहा, “विरोध करने का अधिकार सभी को है। लेकिन अगर उस विरोध की आड़ में राष्ट्रीय ध्वज, राज्य या देश के खिलाफ कोई संदेश दिया जाता है, तो यह किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है। इसीलिए आज लोग अपने दल के झंडे छोड़कर तिरंगा लेकर सड़कों पर उतरे हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक ही है, राष्ट्रविरोधी राजनीति के खिलाफ विरोध करना।”































