दोषी पाए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री पर भी होगी FIR की सिफारिश – सीएम शुभेंदु अधिकारी
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया है कि अम्फान राहत घोटाले से जुड़ी CAG (Comptroller and Auditor General) की रिपोर्ट 25 जुलाई को विधानसभा में पेश की जाएगी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में जिन लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के सबूत मिलेंगे, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। यदि आवश्यकता पड़ी तो पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्री या किसी बड़े नेता के खिलाफ भी FIR दर्ज कराने की सिफारिश राज्यपाल से की जाएगी।मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि पिछली सरकार ने CAG रिपोर्ट को सदन में पेश नहीं किया, जबकि नियमों के अनुसार उस पर चर्चा कराना अनिवार्य था। अब उनकी सरकार रिपोर्ट को सार्वजनिक करेगी और अगले सत्र में उस पर विस्तृत चर्चा कर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।
अम्फान राहत राशि में भ्रष्टाचार के आरोप
साल 2020 में आए चक्रवात अम्फान से पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में भारी तबाही हुई थी। राहत एवं पुनर्वास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो चरणों में 3,750 करोड़ रुपये की सहायता दी थी। बाद में आरोप लगे कि राहत राशि और सामग्री का बड़ा हिस्सा वास्तविक पीड़ितों तक नहीं पहुंचा।मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि इस मामले में कोलकाता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर होने के बाद विशेष CAG जांच कराई गई थी, लेकिन पिछली सरकार ने उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की।
दोषियों पर होगी कानूनी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि CAG रिपोर्ट में जहां-जहां भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलेंगे, वहां राज्य सरकार राज्यपाल को FIR की सिफारिश भेजेगी। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी बड़े नेता या पूर्व मंत्री को बख्शा नहीं जाएगा।
अभिषेक बनर्जी पर भी राजनीतिक निशाना
अम्फान राहत घोटाले के कई आरोप दक्षिण 24 परगना और डायमंड हार्बर क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि इस मुद्दे के जरिए विपक्ष के प्रमुख नेता अभिषेक बनर्जी पर भी दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। अभिषेक बनर्जी पहले ही इन मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध बता चुके हैं।
अन्य आयोग 1 अगस्त से होंगे सक्रिय
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग, बाल संरक्षण आयोग, अल्पसंख्यक आयोग और अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग जैसे संवैधानिक निकाय, जिन्हें उन्होंने पिछली सरकार में निष्क्रिय बताया, 1 अगस्त से पूरी तरह सक्रिय होकर शिकायतों पर कार्रवाई शुरू करेंगे।






























