नई दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (PA) सुमित रॉय के बैंक खाते में करीब 15 करोड़ रुपये जमा होने का दावा राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में किया है। राज्य की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इनमें से करीब 71 लाख रुपये अकेले जून महीने में जमा हुए थे। जांच एजेंसियां अब इन लेन-देन के स्रोत को लेकर सवाल उठा रही हैं।
सुमित रॉय शालबोनी जमीन मामले में आरोपी हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत नहीं मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कर रही है।
खाते में बड़े लेन-देन को लेकर जांचकर्ताओं के सवाल
बुधवार को सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल मेहता ने सुमित रॉय के बैंक खाते में हुए लेन-देन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सुमित के खाते में बड़ी रकम जमा हुई है और कुल जमा राशि करीब 15 करोड़ रुपये तक पहुंचती है।
राज्य के मुताबिक, पिछले साल जून में ही उनके खाते में करीब 71 लाख रुपये जमा किए गए। जांचकर्ताओं को इन रकम के स्रोत को लेकर संदेह है। राज्य का कहना है कि इन्हीं वित्तीय लेन-देन की पड़ताल के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
राज्य का आरोप- जांच में सहयोग नहीं कर रहे सुमित
पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया था कि सुमित रॉय जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि पूछताछ के दौरान उनसे कई सवाल किए गए, लेकिन उन्होंने कई सवालों के सीधे और स्पष्ट जवाब नहीं दिए।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में यह जानना चाहा था कि क्या बैंक खाते में भारी मात्रा में नकदी और अन्य लेन-देन को लेकर सुमित से विस्तार से पूछताछ की गई थी। राज्य ने कोर्ट को बताया था कि इस संबंध में उनसे पूछताछ की गई है।
पूछताछ के लिखित रिकॉर्ड पर सुप्रीम कोर्ट की नजर
मामले की पिछली सुनवाई में सुमित रॉय के वकील ने जांच के दौरान लगाए गए आरोपों से इनकार किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूछताछ के दौरान दर्ज किए गए लिखित रिकॉर्ड को देखने का फैसला किया।
बुधवार को राज्य सरकार ने पूछताछ के सेशन का लिखित रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश किया। सुमित रॉय की ओर से भी मामले से जुड़ा एक लिखित दस्तावेज दाखिल किया गया।
राज्य ने कहा- रिकॉर्ड से सामने आए कई सवाल
सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि भले ही सुमित रॉय की ओर से पिछली सुनवाई में आरोपों से इनकार किया गया हो, लेकिन पूछताछ के लिखित रिकॉर्ड से कई सवाल सामने आते हैं। राज्य का दावा है कि पूछताछ के दौरान सुमित कई मौकों पर सवालों का स्पष्ट जवाब देने में असमर्थ रहे।
अब सुप्रीम कोर्ट की पीठ गुरुवार को इस मामले की आगे सुनवाई करेगी।
शालबोनी जमीन मामले में दर्ज हुई थी शिकायत
सुमित रॉय के खिलाफ जमीन से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में शालबोनी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई थी। इसी मामले की जांच के सिलसिले में पुलिस अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर भी पहुंची थी।
पुलिस ने सुमित रॉय की तलाश में देर रात उनके आवास से जुड़े परिसर में कार्रवाई की थी। हालांकि, उस समय सुमित वहां मौजूद नहीं मिले। बाद में उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए।
राजनीतिक फंड और ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ के लेन-देन का भी जिक्र
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में राज्य की ओर से सुमित रॉय को हिरासत में लेकर पूछताछ की मांग की गई थी। राज्य का कहना था कि जांच के दौरान लाखों रुपये के लेन-देन से जुड़ी जानकारी सामने आई है।
पिछले सप्ताह हुई सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल ने कथित वित्तीय लेन-देन का जिक्र करते हुए कहा था कि एक राजनीतिक पार्टी के खाते और ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ के बीच करीब 30 करोड़ रुपये के लेन-देन की जानकारी जांच में सामने आई है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई जारी है और कोर्ट के सामने जांच से जुड़े दस्तावेज और पूछताछ के रिकॉर्ड रखे जा रहे हैं।






























