हाई कोर्ट ने बहाली पर फिर फैसला लेने को कहा
कोलकाता : कोलकाता में सांसद अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास के सामने कार के गार्डरेल से टकराने के मामले में नौकरी गंवाने वाले एक पुलिसकर्मी को अब राहत मिलने की उम्मीद है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने पुलिस विभाग को उनकी बहाली के मामले पर नए सिरे से विचार कर चार सप्ताह के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है।
जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस पार्थ प्रतिम रॉय की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान माना कि पुलिसकर्मी से गलती हुई थी, लेकिन अदालत के मुताबिक यह ऐसी गलती नहीं थी जिसके लिए उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाए।
हल्की सजा दी जा सकती थी
हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिसकर्मी की गलती के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई या हल्की सजा दी जा सकती थी। हालांकि, ऐसी गलती के कारण सीधे नौकरी से हटाना उचित नहीं लगता। अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने का कोई आरोप नहीं है।
अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मामले पर दोबारा विचार करें और चार सप्ताह के भीतर पुलिसकर्मी की सेवा में बहाली को लेकर निर्णय लें।
कब हुई थी नियुक्ति
मामला कोलकाता पुलिस के कर्मचारी धीरेंद्रनाथ महतो से जुड़ा है। उन्हें वर्ष 2000 में कोलकाता पुलिस में ड्राइवर के पद पर नियुक्त किया गया था। वर्ष 2005 में हृदय संबंधी बीमारी के बाद उन्हें अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण ड्यूटी दी गई थी।
4 दिसंबर 2023 को उन्हें सांसद अभिषेक बनर्जी के हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित आवास पर मोबाइल टॉयलेट वैन से संबंधित ड्यूटी पर तैनात किया गया था।
मोबाइल टॉयलेट वैन हटाने के दौरान हुआ हादसा
धीरेंद्रनाथ के अनुसार, मोबाइल टॉयलेट वैन से दुर्गंध आने को लेकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई थी। स्थिति को संभालने के लिए वह अभिषेक बनर्जी के आवास के सामने पहुंचे।
उस समय वैन का ड्राइवर वहां मौजूद नहीं था। पुलिसकर्मी ने खुद वाहन हटाने की कोशिश की। उनका दावा था कि वाहन चलाते समय गलती से रिवर्स गियर लग गया और वैन गार्डरेल से जा टकराई। इसके बाद वाहन घर के प्रवेश द्वार से भी टकरा गया।
पहले सस्पेंड हुए, फिर नौकरी से बर्खास्त
घटना के बाद धीरेंद्रनाथ महतो के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई और 5 दिसंबर 2023 को उन्हें निलंबित कर दिया गया। बाद में निलंबन वापस लिए जाने के बाद उन्होंने दोबारा काम शुरू कर दिया।
हालांकि, 13 फरवरी 2025 को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। उनसे पूछा गया कि उन्हें सेवा से बर्खास्त क्यों न किया जाए। इसके कुछ दिनों बाद, 28 फरवरी को उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
इसके खिलाफ धीरेंद्रनाथ ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया। उनके वकील विकास रंजन भट्टाचार्य और शताब्दी दास ने अदालत में उनका पक्ष रखा।
अब हाई कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस विभाग को मामले पर नए सिरे से विचार करना होगा। इसके बाद तय होगा कि धीरेंद्रनाथ महतो को उनकी पुलिस की नौकरी में वापस लिया जाएगा या नहीं।
































