मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर शुक्रवार को हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। अदालत ने विवादित हिस्से को मंदिर मानते हुए कहा कि वहां हिंदू पूजा की परंपरा कभी समाप्त नहीं हुई। साथ ही मुस्लिम पक्ष को नमाज के लिए दूसरी जगह मांगने की सलाह दी गई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ल और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की बेंच ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों, पुरातात्विक साक्ष्यों और एएसआई की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि भोजशाला परिसर मूल रूप से राजा भोज द्वारा स्थापित संस्कृत शिक्षाकेंद्र और सरस्वती मंदिर था।
धार शहर में स्थित कमाल मौला मस्जिद और दरगाह को लेकर वर्षों से विवाद चला आ रहा है। हिंदू संगठनों का दावा रहा है कि यह स्थल प्राचीन सरस्वती मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद मानता आया है। फिलहाल वहां मंगलवार को हिंदुओं को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति दी जाती थी।हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विवादित हिस्से की सुरक्षा और संरक्षण की पूरी जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पास रहेगी। अदालत ने यह भी कहा कि लंदन संग्रहालय से मां सरस्वती की प्रतिमा वापस लाने संबंधी हिंदू पक्ष की मांग पर केंद्र सरकार विचार कर सकती है. गौरतलब है कि 2022 में हिंदू संगठनों ने अदालत में याचिका दायर कर भोजशाला में केवल हिंदू पूजा की अनुमति देने की मांग की थी। इसके बाद 2024 में हाई कोर्ट ने एएसआई को वैज्ञानिक सर्वेक्षण का आदेश दिया था। करीब 98 दिनों तक चले सर्वे के बाद एएसआई ने लगभग 2000 पन्नों की रिपोर्ट अदालत में सौंपी थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मौजूदा मस्जिद से पहले वहां परमार काल का विशाल हिंदू ढांचा मौजूद था। हालांकि मुस्लिम पक्ष ने एएसआई की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताते हुए उसका विरोध किया था। इसी मामले में अब हाई कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाया है।

























