कोलकाता : पश्चिम बंगाल में औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार नई औद्योगिक नीति लाने जा रही है। बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में औद्योगिक नीति के मसौदे को मंजूरी दे दी गई। अब 5 नवंबर को नवान्न के सभागार में आयोजित प्रशासनिक बैठक के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी इस नीति का औपचारिक ऐलान करेंगे। सरकार का लक्ष्य राज्य में निवेश बढ़ाना, उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
निवेश और रोजगार पर रहेगा जोर
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से शुभेंदु अधिकारी सरकार राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। सरकार के मुताबिक, हुगली और बांकुड़ा जैसे जिलों में भी भारी और मध्यम उद्योगों के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
नई औद्योगिक नीति तैयार करने की प्रक्रिया जून से शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य राज्य में निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाना, प्रशासनिक अड़चनों को दूर करना और उद्योगपतियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है।
सरकार का मानना है कि एक स्पष्ट और व्यवस्थित औद्योगिक नीति से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। इसके जरिए राज्य में नए उद्योग स्थापित करने और मौजूदा औद्योगिक इकाइयों के विस्तार का रास्ता भी आसान हो सकता है।
हल्दिया में 6,000 करोड़ रुपये के निवेश का दावा
औद्योगिक निवेश के मोर्चे पर हल्दिया से भी अच्छी खबर सामने आई है। खबर के मुताबिक, दुर्गापूजा से पहले चटर्जी समूह की ओर से पूर्व मेदिनीपुर के हल्दिया में करीब 6,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना सुनिश्चित हुई है।
इसके अलावा, जापान की बहुराष्ट्रीय कंपनी मित्सुबिशी ने भी पश्चिम बंगाल में बड़े निवेश को लेकर रुचि दिखाई है। हालांकि, प्रस्तावित निवेश की परियोजनाओं, समयसीमा और रोजगार सृजन से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
सरकार की प्राथमिकताओं में निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाना, लालफीताशाही कम करना और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर तैयार करना शामिल है। नई औद्योगिक नीति से यह उम्मीद की जा रही है कि राज्य में घरेलू और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
48 लाख किसानों को मिलेंगे 2,000 रुपये
औद्योगिक नीति के अलावा मंत्रिमंडल की बैठक में किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े फैसले भी लिए गए। सरकार की योजना के अनुसार, 5 नवंबर को हुगली जिले के पुरशुड़ा से राज्य के करीब 48 लाख पंजीकृत किसानों के बैंक खातों में 2,000 रुपये की राशि सीधे भेजी जाएगी।
खबर के मुताबिक, यह रकम प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत राज्य की ओर से दिए जाने वाले हिस्से के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और कृषि मंत्री की मौजूदगी में इस भुगतान प्रक्रिया की शुरुआत किए जाने की बात कही गई है। राज्य के अन्य जिलों के किसान और प्रतिनिधि भी ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में शामिल होंगे।
‘कृषक बंधु’ योजना का नाम बदलने की तैयारी
मंत्रिमंडल ने राज्य की मौजूदा ‘कृषक बंधु’ योजना का नाम बदलकर ‘मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि’ करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इस बदलाव के बाद योजना की पहचान और उसके क्रियान्वयन से जुड़े औपचारिक पहलुओं पर सरकार की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
कृषि क्षेत्र से जुड़े इन फैसलों को ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सहायता देने और किसानों तक सरकारी लाभ पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विकास कार्यों के लिए बजट जारी करने का निर्देश
बैठक में सरकारी विभागों के खर्च और विकास योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जिन विभागों ने अपने वार्षिक बजट का 35 प्रतिशत हिस्सा खर्च कर लिया है, उनके लिए अगली किस्त की राशि जल्द जारी करने का निर्देश वित्त विभाग को दिया गया है।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धन की कमी या प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण विकास कार्य बाधित न हों। इससे विभिन्न विभागों की योजनाओं को समय पर आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
कालीपूजा और दिवाली पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा
मंत्रिमंडल की बैठक में कालीपूजा और दिवाली के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। त्योहारों के मद्देनजर राज्यभर में प्रशासनिक सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलों की स्थिति पर नजर रखने के लिए मंत्रियों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला भी किया गया है। सरकार का कहना है कि त्योहारों के दौरान शांति और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता रहेगी। नई औद्योगिक नीति, किसानों को आर्थिक सहायता और विकास योजनाओं के लिए धन जारी करने जैसे फैसलों के जरिए शुभेंदु अधिकारी सरकार आर्थिक गतिविधियों को गति देने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। अब सभी की निगाहें 5 नवंबर पर टिकी हैं, जब नई औद्योगिक नीति की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।































