कोलकाता : गंगासागर धाम भवन निर्माण प्रकल्प हेतु श्री दाधीच परिषद (कोलकाता) के बैनर तले वीआईपी रोड (गोलाघाटा) स्थित डीवीनीटी पैवेलियन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को कपिल अवतार, जड़ भरत चरित्र और अजामिल आख्यान प्रसंग पर राष्ट्रीय संत स्वामी श्री गोविंददेव गिरिजी महाराज ने सारगर्भित प्रवचन दिया।स्वामीजी ने कहा कि दुष्टों का संहार करने नहीं, बल्कि भक्तों से मिलने भगवान अवतार लेते हैं। उन्होंने कहा कि रावण या कंश को मारने के लिए भगवान को अवतार लेने की जरूरत नहीं थी। परमात्मा किसी को भी भेजकर दोनों का वध करवा सकते थे, लेकिन मीराबाई और शबरी को दर्शन देने भगवान को स्वयं आना बहुत जरूरी था।उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियों में भटकने के बाद प्रभु की असीम कृपा से हमें यह मानव तन मिला है, जिसका सदुपयोग सत्कर्म और परोपकार में करना चाहिए। व्यासपीठ से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास (अयोध्या) के महासचिव गोविंद गिरिजी ने कहा कि संसार के सारे रिश्ते-नाते झूठे हैं और केवल एक परमात्मा का नाम सत्य है, जो हमारे साथ रहता है।
उन्होंने कहा कि स्त्री के लिए पतिव्रता होना ही सबसे बड़ा धर्म है। पति ही पत्नी के लिए परमेश्वर है। उन्होंने कहा- जीवन में जब भी संत-दर्शन हो तो उसे कृष्ण कृपा समझना चाहिए। जीवन में संत आए तो समझो भगवान आ गए। तारों के माध्यम से जैसे बिजली आती है वैसे ही संतों के माध्यम से ठाकुरजी आते हैं। सत्संग करने से ही उद्वव को श्रीमद्भागवत का ज्ञान हुआ। श्रीमद्भागवत कथा पर प्रवचन करते हुए स्वामीजी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा पाने के लिए श्रीमद्भागवत कथा से प्रेम और प्रभु के नाम का जाप आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सूर्य की तरह जीवन को ज्ञान और भक्ति के प्रकाश से भर देती है। खचाखच भरे सभागार में प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत साक्षात श्रीकृष्ण का स्वरूप है। कथा के श्रवण से ज्ञान, भक्ति, वैराग्य और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। ईश्वर की इच्छा को अपनी इच्छा से जोड़कर जीवन को प्रभुमय बनाया जा सकता है।उन्होंने कहा कि भागवत की गहराई नापना सहज नहीं है। यह वक्ता की क्षमता और ज्ञान पर निर्भर करता है कि वह किस तरह और किस शब्दों में श्रोताओं के समक्ष भागवत का वर्णन करता है।
महाराजश्री ने कहा कि कथा सुनने मात्र से कुछ होने वाला नहीं है, कथा का मनन जरुरी है। व्यासपीठ से गिरिजी महाराज ने कहा कि जीवन में संभल कर चलना जरूरी है। भगवान के भजन बगैर मनुष्य जीवन बेकार है। स्वामी रामकृष्ण परमहंस का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि रामकृष्ण ने केवल भजन व भक्ति की और सदा-सदा के लिए अमर हो गए। स्वामीजी ने ‘हरि अनंत हरि कथा अनंता’ पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रसाद सदैव बांट कर खाना चाहिए। विद्या प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, विद्या दान के जरिए अन्य को भी जागरूक करना ही गुरुजनों का कर्तव्य है। गोविंद शारदा, जुगल कोटरीवाल, शिवरतन मोहता, राजेश सोमानी, मदनलाल ईनाणिया, पंकज जोशी व कन्हैयालाल बेरीवाल समेत कई जाने माने लोग बतौर अतिथि उपस्थित थे। गोपी कृष्ण दाधीच, सुरेश ईनाणिया, पंकज शर्मा, अनुराग शर्मा, संदीप ईनाणिया, राहुल शर्मा, पंडित गिरधर शर्मा, अलका काकड़ा, रेणु मिश्रा, संतोष ईनाणिया, हरीश तिवाड़ी व अभिलाष तिवाड़ी और पिंकी शर्मा ने सक्रिय भूमिका निभाई।































