कोलकाता : जहां काम है वहां श्रृंगार है पर जहां प्रेम है वहां श्रृंगार नहीं।गोपियों का श्रीकृष्ण के प्रति सहज प्रेम है।जब श्रीकृष्ण महारास के लिए वंशी बजाई तब गोपियां दौड़कर आई।महारास शुरू हुआ। गोपियों के मन में अहम भाव आया तो उनके चित्त को पवित्र करने के लिए महारास से अंतर्धान हो गए।
जब गोपियों को अपनी गलती का भान हुआ,कृष्ण-कृष्ण पुकारने लगी।कृष्ण गोपियों के प्रेम को देखकर पुन:महारास में प्रकट हुए। भगवान का स्वभाव है कि जो उनको चाहता है,उनसे प्रेम करता है,उसे अपना लेते हैं। रूक्म अपनी बहन रुक्मणी का विवाह शिशुपाल से निश्चित कर दिया था पर रुक्मणी तो द्वारिकाधीश भगवान श्रीकृष्ण से विवाह करना चाहती थी।रुक्मणी ने अपनी भावना को मां को बताकर श्रीकृष्ण को एक ब्राह्मण के माध्यम से अपना संदेश-पत्र भेजा।अपने संदेश पत्र में रुक्मणी ने लिखा,हे चक्र चलाने वाले मोहन! अब मुझे जिन्दा करो।मैं आपसे ही विवाह करूंगी शिशुपाल से नहीं।इधर शिशुपाल रुक्मणी से विवाह करने के लिए सैन्य बल और अन्य राजाओं को एकत्रित करने लगा पर उसे बुरे सपने आने लगे।बुरा सपना देखने पर भगवान का भजन करना चाहिए।
उधर श्रीकृष्ण को अच्छे सपने आने लगे। सपने आते हैं तो प्रकृति सपने के माध्यम से आगे की बात सुझाती है। श्रीकृष्ण रुक्मणी की प्रार्थना को सुनकर आते हैं ,रुक्मणी को ले जाते हैं और विवाह करते हैं।इस दौरान रूक्म से कृष्ण का युद्ध होता है। अंत में कृष्ण रूक्म को मारने वाले ही थे तब रुक्मणी ने ऐसा न करने की प्रार्थना करने लगी। रूक्म को जब पता चल गया कि कृष्ण भगवान है तब कृष्ण ने उस कृपा कर उसे अपना चतुर्भुज स्वरूप दिखाया।ये बातें राजस्थान गौ कल्याण ट्रस्ट के तत्वावधान में श्रीमद्भागवत कथा पर प्रवचन करते हुए आचार्य श्रीकांत शर्मा’बालव्यास ‘ ने राजेश गणपति सभागार में कहीं।
इस अवसर रंजना शर्मा,डा.प्रेमशंकर त्रिपाठी,सुशील गोयनका,राजेश मित्तल,शिखा गोयल,शशि गोयल,रवि भालोटिया,रमाकांत बेरीवाल,आचार्य राकेश पाण्डेय,महावीर प्रसाद रावत,पुरुषोत्तम तिवारी,नंदनी-अमित सराफ सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।कार्यक्रम का संचालन संजय मस्करा ने किया।






























