विकास भवन के बाहर प्रदर्शन; सरकार से संविदा बहाल करने की मांग । छठे और सातवें फेज के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने लगाया भेदभाव का आरोप, वेतन में भी बड़े अंतर का दावा
कोलकाता : दुर्गापूजा से पहले पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में काम करने वाले 3719 ICT कंप्यूटर शिक्षक-शिक्षिकाओं के बेरोजगार होने का मामला सामने आया है। नौकरी खत्म होने से नाराज सरकारी स्कूलों के ICT कंप्यूटर शिक्षक-शिक्षिका एकता मंच की ओर से सोमवार को विकास भवन अभियान किया गया। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने सरकार से नौकरी बहाल करने और पहले के फेज के शिक्षकों के समान सुविधाएं देने की मांग की।
अनुबंध खत्म होते ही नौकरी जाने का आरोप
शिक्षकों का कहना है कि छठे और सातवें फेज में सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षक-शिक्षिकाओं के रूप में काम करने वाले कुल 3719 शिक्षक फिलहाल बेरोजगार हो गए हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने कंप्यूटर शिक्षकों के अलग-अलग फेज के बीच भेदभाव किया है।
शिक्षकों के अनुसार, पहले से पांचवें फेज तक सरकारी स्कूलों में इसी तरह एजेंसी के माध्यम से नियुक्त कंप्यूटर शिक्षक-शिक्षिकाओं को बाद में सरकार की ओर से संविदा के आधार पर नियुक्त किया गया। उन्हें संविदा से जुड़ी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। इसके विपरीत छठे और सातवें फेज के शिक्षकों का अनुबंध समाप्त होने के बाद उनकी सेवा जारी नहीं रखी गई।
3719 शिक्षकों की नौकरी जारी रखने की मांग
ICT कंप्यूटर शिक्षक-शिक्षिका एकता मंच की प्रमुख मांग है कि छठे और सातवें फेज के सभी 3719 शिक्षकों को भी पहले से पांचवें फेज के शिक्षकों की तरह सरकारी संविदा के तहत नियुक्ति और सुविधाएं दी जाएं।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय तक सरकारी स्कूलों में काम करने के बावजूद अनुबंध समाप्त होते ही उनकी नौकरी खत्म हो गई। इससे पूजा के ठीक पहले बड़ी संख्या में शिक्षक आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
वेतन में भी भारी अंतर का दावा
शिक्षकों ने वेतन में असमानता का मुद्दा भी उठाया है। उनके मुताबिक, पहले से पांचवें फेज तक नियुक्त कंप्यूटर शिक्षक-शिक्षिकाओं को 25 हजार से 30 हजार रुपये तक मासिक वेतन मिलता है। वहीं छठे और सातवें फेज के संविदा आधारित कंप्यूटर शिक्षकों का मासिक वेतन कथित तौर पर 6,700 से 7,100 रुपये के बीच है।
शिक्षकों ने सरकार से मांग की है कि सेवा शर्तों, वेतन और अन्य सुविधाओं में अंतर को खत्म किया जाए तथा छठे और सातवें फेज के शिक्षकों की नौकरी को जारी रखने के लिए जल्द फैसला लिया जाए। विकास भवन अभियान के दौरान शिक्षकों ने सरकार से उनकी मांगों पर तत्काल विचार करने की अपील की। उनका कहना है कि दुर्गापूजा से पहले रोजगार छिनने से उनके परिवारों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
































