SIR पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: ‘क्या हम तय करें आपके पिता–माता कौन हैं?’ याचिका खारिज
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए इसे खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने टिप्पणी की—“क्या आप चाहते हैं कि हम अनुच्छेद 32 के तहत यह तय करें कि आपके पिता, माता और भाई कौन हैं? चुनाव आयोग के पास जाइए।”
यह याचिका जिमफरहाद नवाज की ओर से दायर की गई थी, जिसमें SIR प्रक्रिया के दौरान “तथ्यगत असंगति” (Logical Discrepancy) संबंधी दिशा-निर्देशों को चुनौती दी गई थी।
क्या है पूरा मामला?
पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में दर्ज सूचनाओं में पाई गई असंगतियों को चिह्नित किया है। “तथ्यगत असंगति” से तात्पर्य है—मतदाता के पारिवारिक विवरण, उम्र, पते या अन्य जानकारियों में तार्किक मेल न होना।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह प्रक्रिया मनमानी है और संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) तथा अनुच्छेद 324 (चुनाव आयोग की शक्तियां) के खिलाफ है। साथ ही, उन्होंने अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के तथ्यात्मक विवादों के समाधान के लिए पहले संबंधित प्राधिकरण, यानी भारतीय चुनाव आयोग के पास जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली भी शामिल थे। अदालत ने सवाल उठाया कि क्या पारिवारिक संबंधों की पुष्टि जैसे तथ्यात्मक मामलों को सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है?
अदालत ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामलों के लिए है, न कि हर प्रशासनिक या तथ्यात्मक विवाद के लिए।
पहले क्या निर्देश दिए थे?
गौरतलब है कि पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे। अदालत ने कहा था कि:
- “तथ्यगत असंगति” की सूची सार्वजनिक की जाए
- ग्राम पंचायत, ब्लॉक कार्यालय और वार्ड कार्यालयों में सूची चस्पा की जाए
- हर ब्लॉक में अलग काउंटर खोला जाए
- आम नागरिकों को दस्तावेज जमा करने और आपत्ति दर्ज करने का अवसर दिया जाए
चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक चरण में लगभग 1.36 करोड़ मतदाताओं को “तथ्यगत असंगति” के आधार पर चिह्नित किया गया था। बाद में यह संख्या घटकर करीब 94 लाख रह गई। 14 फरवरी तक संबंधित मतदाताओं को नोटिस भेजकर सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की गई।
कब आएगी अंतिम सूची?
चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के तहत संशोधित अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। इस सूची पर सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों की नजर टिकी हुई है।
सियासी और प्रशासनिक महत्व
मतदाता सूची में किसी भी प्रकार का बदलाव चुनावी गणित पर सीधा असर डाल सकता है। इसलिए SIR को लेकर राजनीतिक हलकों में भी हलचल बनी हुई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि तथ्यात्मक विवादों के लिए पहले प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
निष्कर्ष
SIR को लेकर दायर याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह संदेश दिया है कि हर विवाद सीधे सर्वोच्च अदालत में नहीं लाया जा सकता। चुनावी प्रक्रिया से जुड़े तथ्यात्मक मामलों में पहले चुनाव आयोग के समक्ष उचित मंच पर आपत्ति दर्ज करानी होगी।
अब सबकी निगाह 28 फरवरी को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची पर है, जो आगामी चुनावी परिदृश्य को प्रभावित कर सकती है।
























