बंगाल के 24 जिलों के DEO सक्रिय
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कई योग्य नागरिकों के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं। वहीं, कई नए मतदाता भी अपना नाम दर्ज नहीं करा सके हैं। इस मुद्दे पर जारी राजनीतिक विवाद के बीच अब चुनाव आयोग ने पहल की है। आयोग के निर्देश पर पश्चिम बंगाल के सभी 24 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए जागरूकता अभियान चला रहे हैं। आयोग का स्पष्ट उद्देश्य है कि कोई भी योग्य नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।
देशभर में मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल में भी SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने और नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया को लेकर विवाद हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए थे। इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस ने कोलकाता स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय तक अभियान चलाने का भी आह्वान किया था।
इसी राजनीतिक माहौल के बीच सोमवार को राज्य के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी के हस्ताक्षर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में मतदाता सूची में योग्य नागरिकों के नाम शामिल करने के लिए विशेष पहल की जानकारी दी गई। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया किसी एक निश्चित अवधि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
घर-घर जाकर योग्य मतदाताओं की पहचान करेंगे BLO
चुनाव आयोग की योजना के अनुसार, बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) SIR से पहले और उसके बाद की मतदाता सूचियों का मिलान करेंगे। इस दौरान उन योग्य नागरिकों की पहचान की जाएगी, जिनका नाम किसी कारणवश सूची में शामिल नहीं हो पाया है।
इसके बाद BLO जरूरत के अनुसार ऐसे नागरिकों के घर जाकर उनसे संपर्क करेंगे। उनकी मौजूदा स्थिति की जांच करने के बाद योग्य लोगों को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 भरने में सहायता दी जाएगी। फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है।
मोहल्लों में लगेंगे विशेष शिविर, बेघर लोगों पर भी ध्यान
आम नागरिकों की सुविधा के लिए विभिन्न इलाकों में बूथ स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही समाज के वंचित और हाशिए पर रहने वाले लोगों तक पहुंचने के लिए भी विशेष योजना बनाई गई है।
आयोग की पहल के तहत रैन बसेरों, श्रमिक कॉलोनियों और बेघर लोगों के बीच विशेष शिविर लगाए जाएंगे। ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में मदद दी जाएगी, जिन्हें सामान्य प्रक्रिया के तहत आवेदन करने में परेशानी हो सकती है।
स्कूल-कॉलेजों में भी चलेगा जागरूकता अभियान
मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से जुड़ी जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा SVEEP यानी ‘सिस्टेमैटिक वोटर्स एजुकेशन एंड इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन’ कार्यक्रम और स्थानीय प्रचार माध्यमों की मदद से भी अभियान चलाया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी मुख्य निर्वाचन अधिकारी से लेकर सभी जिला निर्वाचन अधिकारी करेंगे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से संबंधित किसी भी शिकायत या समस्या के लिए नागरिक अपने क्षेत्र के बूथ स्तर के अधिकारी (BLO), सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (AERO), निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) या जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) से संपर्क कर सकते हैं।
SIR के बाद मतदाता सूची से नाम छूटने को लेकर बनी चिंता के बीच आयोग की इस पहल पर अब सबकी नजर है। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिन योग्य नागरिकों के नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं हो पाए, वे इस अभियान के माध्यम से कितनी आसानी से आवेदन कर पाते हैं।































