चंद्रशेखरन पर बोर्ड ने जताया भरोसा, टाटा ट्रस्ट ने फैसले को बताया ‘अवैध’। टाटा संस बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को पांच साल के लिए फिर चेयरमैन बनाने का फैसला किया, नॉयल टाटा की आपत्ति के बावजूद प्रस्ताव पारित ।
मुंबई : टाटा समूह में एक बार फिर अंदरूनी मतभेद सामने आते दिखाई दे रहे हैं। टाटा संस के बोर्ड ने मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को पांच साल के लिए फिर से चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया है। खास बात यह है कि चंद्रशेखरन ने पिछले महीने ही अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद पद छोड़ने की घोषणा की थी।
बोर्ड के फैसले के बाद टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच मतभेद सार्वजनिक हो गए हैं। नॉयल टाटा की अध्यक्षता वाले टाटा ट्रस्ट ने बोर्ड के इस फैसले को ‘अवैध’ बताया है। वहीं, टाटा संस बोर्ड ने मतदान के जरिए चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव को मंजूरी दी।
फरवरी में भी उठा था कार्यकाल बढ़ाने का मुद्दा
चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को घोषणा की थी कि उनका मौजूदा कार्यकाल अगले वर्ष 20 फरवरी को समाप्त होने के बाद वह टाटा संस के चेयरमैन पद पर नहीं रहेंगे। इसके बाद टाटा संस बोर्ड ने गुरुवार को उन्हें अगले पांच वर्षों के लिए फिर से नियुक्त करने का निर्णय लिया।
इससे पहले फरवरी में भी उनके कार्यकाल को बढ़ाने का प्रस्ताव चर्चा में आया था, लेकिन उस समय इस पर फैसला टाल दिया गया था। इसी दौरान टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच मतभेद की खबरें सामने आई थीं।
नॉयल टाटा ने किया विरोध
रिपोर्टों के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नॉयल टाटा ने पहले भी चंद्रशेखरन के कार्यकाल को बढ़ाने का विरोध किया था। कथित तौर पर दोनों पक्षों के बीच टाटा संस की भविष्य की रणनीति और कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने जैसे मुद्दों पर मतभेद थे।
गुरुवार की बोर्ड बैठक में नॉयल टाटा को छोड़कर बाकी सभी सदस्यों ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद मतदान में प्रस्ताव पारित हो गया।
हालांकि, इसके तुरंत बाद टाटा ट्रस्ट की ओर से इस निर्णय की वैधता पर सवाल उठाया गया और इसे ‘अवैध’ बताया गया। इससे समूह के भीतर चल रहे मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
टाटा संस के पास समूह की प्रमुख कंपनियों का नियंत्रण
टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है। इसके तहत टीसीएस, टाटा मोटर्स और एयर इंडिया समेत समूह की कई बड़ी कंपनियां आती हैं। टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
इसी वजह से टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच संबंध और दोनों संस्थाओं के अधिकारों से जुड़े फैसले समूह के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
क्या शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो सकती है टाटा संस?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच टाटा संस के संभावित शेयर बाजार में उतरने की चर्चा भी तेज हो गई है। करीब दो वर्ष पहले टाटा संस ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) का लाइसेंस छोड़ने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) में आवेदन किया था।
रिपोर्टों के अनुसार, आरबीआई ने हाल में इस आवेदन को खारिज कर दिया है। इसके बाद टाटा संस के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की संभावना बढ़ने की चर्चा है।
ऐसे में कंपनी के संभावित आईपीओ को लेकर भी बाजार में अटकलें हैं। हालांकि, आईपीओ की समयसीमा और उसकी अंतिम संरचना को लेकर अभी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
चंद्रशेखरन के सामने बड़ी जिम्मेदारी
टाटा संस बोर्ड का ताजा फैसला ऐसे समय आया है जब कंपनी के सामने समूह की भविष्य की रणनीति, संभावित शेयर बाजार सूचीबद्धता और टाटा ट्रस्ट के साथ संबंधों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। चंद्रशेखरन को पांच साल के लिए फिर जिम्मेदारी देने का फैसला अब समूह के भीतर आगे की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
































