चार बैंक खाते चालू कराने की याचिका खारिज
कोलकाता : चार बैंक खातों को दोबारा चालू कराने की मांग को लेकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने चार बैंक खातों को फ्रीज रखने के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। पार्टी की ओर से इन खातों के इस्तेमाल की अनुमति देने की मांग की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
उपचुनाव से पहले खाते चालू कराने की मांग
ममता तृणमूल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई थी कि पार्टी का हर महीने करीब 12 करोड़ रुपये का खर्च होता है। ऐसे में आने वाले उपचुनावों को देखते हुए इन बैंक खातों में जमा राशि का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस का चुनाव चिह्न फिलहाल फ्रीज किया जा चुका है और इस स्थिति में कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं बनता।
राज्य पुलिस ने फ्रीज किए चार बैंक खाते
बताया गया है कि जिन चार बैंक खातों को लेकर विवाद है, उन्हें राज्य पुलिस ने फ्रीज किया था। इसके बाद ममता तृणमूल ने इस कार्रवाई के खिलाफ कोलकाता हाई कोर्ट का रुख किया था। हालांकि हाई कोर्ट ने बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं किया।
इसके बाद पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और खातों में मौजूद धन का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी। लेकिन शीर्ष अदालत से भी राहत नहीं मिली।
पहले ED ने फ्रीज किए थे तीन खाते
इस मामले से अलग, तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों को पहले प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने फ्रीज किया था। इन खातों में मौजूद राशि के इस्तेमाल की अनुमति के लिए ममता तृणमूल ने कोलकाता हाई कोर्ट का रुख किया था।
उस समय हाई कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ इन खातों में मौजूद धन का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। अदालत ने इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक विशेष अधिकारी भी नियुक्त किया था।
अदालत के निर्देश के मुताबिक, पार्टी के किसी भी दो अधिकृत व्यक्ति तीन बैंक खातों से संबंधित चेक पर हस्ताक्षर कर सकते थे। इसके बाद विशेष अधिकारी भी चेक पर हस्ताक्षर करते थे और तभी बैंक से भुगतान किया जाता था।
खातों में बड़े लेनदेन को लेकर उठे सवाल
इन बैंक खातों को फ्रीज करने के पीछे लेनदेन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसियों और संबंधित पक्षों की ओर से आरोप लगाया गया है कि इन खातों में विभिन्न मामलों में आरोपी बताए गए व्यक्तियों और कंपनियों से बड़ी रकम ट्रांसफर हुई।
आरोपों के मुताबिक, तृणमूल नेता देबराज चक्रवर्ती की ओर से चरणबद्ध तरीके से करीब 10 करोड़ रुपये जमा किए गए। इसके अलावा विवादित कंपनी ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ से करीब 30 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जाने का भी आरोप है।
इसी तरह अभिषेक बनर्जी के PA सुमित राय की ओर से करीब 7 करोड़ रुपये जमा किए जाने का दावा किया गया है।
लेनदेन पर रोक को लेकर जांच का आधार
संबंधित पक्षों की ओर से दलील दी गई है कि अलग-अलग मामलों में आरोपी बताए गए लोगों और कंपनियों के माध्यम से बड़ी रकम बैंक खातों में आने के कारण इनके लेनदेन पर रोक लगाना जरूरी था। इसी आधार पर खातों को फ्रीज रखने की कार्रवाई की गई।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद चार बैंक खातों पर लगी रोक जारी रहेगी। वहीं, पार्टी की ओर से खातों का इस्तेमाल कर आगामी उपचुनावों से जुड़े खर्च पूरे करने की मांग को शीर्ष अदालत से राहत नहीं मिली है।































