मालदा : पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बीजेपी ने एक और बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया है। मालदा जिला परिषद पर कब्जे के एक दिन बाद अब बीजेपी ने इंग्लिश बाजार नगरपालिका में भी बोर्ड बनाने में सफलता हासिल कर ली। खास बात यह है कि बीजेपी के पास नगरपालिका में केवल तीन पार्षद हैं। इसके बावजूद बुधवार को चेयरमैन पद के चुनाव में उसे तृणमूल कांग्रेस के 11 पार्षदों और एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन मिल गया।
बीजेपी की ओर से अम्लान भादुड़ी को चेयरमैन पद का उम्मीदवार बनाया गया था। वह विधानसभा में सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक भी हैं। बोर्ड गठन की बैठक में बीजेपी पार्षद सुतपा मुखोपाध्याय ने अम्लान भादुड़ी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका समर्थन कृष्णा नाग ने किया। इसके बाद तृणमूल से अलग होकर निर्दलीय हुए 11 पार्षदों ने भी अम्लान के पक्ष में मतदान किया। एक अन्य निर्दलीय पार्षद ने भी बीजेपी उम्मीदवार का समर्थन किया।
इस तरह बीजेपी ने संख्या बल के लिहाज से जरूरी आंकड़ा हासिल कर इंग्लिश बाजार नगरपालिका पर कब्जा कर लिया।
11 तृणमूल पार्षदों ने खुद को बताया निर्दलीय
बोर्ड गठन से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस के 11 पार्षदों ने खुद को निर्दलीय घोषित कर दिया था। इन पार्षदों ने इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भी दिया था। हालांकि, इन पार्षदों ने साफ किया कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है।
इनमें से एक पार्षद शुभमय बसु ने कहा कि वे दल छोड़कर किसी दूसरे दल में शामिल नहीं हुए हैं, बल्कि निर्दलीय के तौर पर काम करना चाहते हैं।
उन्होंने इसके पीछे पार्टी के चुनाव चिह्न को लेकर पैदा हुई स्थिति और नगरपालिका की कथित बदहाल व्यवस्था को कारण बताया। उनके मुताबिक, पिछले कुछ महीनों से नगरपालिका की सेवाएं प्रभावित हुई थीं और पार्षदों के पास अपने वार्डों में जनता से जुड़े काम करने के पर्याप्त अवसर नहीं थे। उनका कहना है कि अब वे निर्दलीय के रूप में बाकी कार्यकाल में लोगों को बेहतर नागरिक सेवाएं देना चाहते हैं।
तृणमूल ने नहीं उतारा अपना उम्मीदवार
बोर्ड गठन की बैठक से पहले ही 11 निर्दलीय पार्षदों ने संकेत दे दिया था कि वे चेयरमैन पद के लिए अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे। बैठक में बीजेपी के उम्मीदवार अम्लान भादुड़ी के नाम का प्रस्ताव होने के बाद इन पार्षदों ने उनका समर्थन कर दिया।
हालांकि, इंग्लिश बाजार के नवनिर्वाचित चेयरमैन ने इसे तृणमूल कांग्रेस में टूट से जोड़ने से इनकार किया। उनका कहना था कि किसी पार्षद को तोड़कर बीजेपी में नहीं लाया गया है। तत्कालीन चेयरमैन के इस्तीफे के बाद नियम के मुताबिक बोर्ड गठन की प्रक्रिया हुई और इसी प्रक्रिया के दौरान उनके नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिसे कुछ पार्षदों ने समर्थन दिया।
पहले तृणमूल के पास था बहुमत
इंग्लिश बाजार नगरपालिका में अब तक तृणमूल कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत था। पार्टी के 25 पार्षद बताए जा रहे थे। बुधवार की बैठक में तृणमूल के बाकी 14 पार्षद भी मौजूद थे। इसके बावजूद 11 पार्षदों के निर्दलीय खेमे में जाने और बीजेपी उम्मीदवार को समर्थन देने से समीकरण पूरी तरह बदल गया।
दिलचस्प बात यह रही कि पूर्व चेयरमैन कृष्णेंदु नारायण चौधरी भी बैठक में मौजूद थे। पूर्व तृणमूल विधायक और नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन निहाररंजन घोष की पत्नी गायत्री घोष भी बैठक में मौजूद थीं। दोनों नेताओं के बीच पहले राजनीतिक मतभेद सामने आते रहे हैं, लेकिन मतदान के दौरान दोनों एक ही खेमे में नजर आए।
जिला परिषद के बाद नगरपालिका पर भी बीजेपी का कब्जा
मालदा में बीजेपी के लिए यह लगातार दूसरी बड़ी राजनीतिक सफलता है। इससे एक दिन पहले ही पार्टी ने मालदा जिला परिषद पर भी कब्जा किया था।
जिला परिषद के बोर्ड गठन के दौरान भी राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले। बीजेपी के पास पहले केवल चार सदस्य थे, लेकिन तृणमूल के एक गुट के समर्थन के बाद बीजेपी की उम्मीदवार दीपिका बाला सभाधिपति चुनी गईं। इस दौरान कांग्रेस ने बैठक का बहिष्कार किया।
जिला परिषद के बाद अब इंग्लिश बाजार नगरपालिका में भी बीजेपी के बोर्ड गठन से मालदा की स्थानीय राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि निर्दलीय हुए 11 पार्षदों का राजनीतिक रुख क्या रहता है और नगरपालिका के कामकाज पर इस बदले हुए समीकरण का क्या असर पड़ता है।































