2028 तक TET पास करने की अनिवार्यता का विरोध, कार्यरत शिक्षकों का विकास भवन अभियान
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में करीब 90 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट के बादल मंडराने की आशंका जताई जा रही है। दरअसल, ऐसे हजारों शिक्षक हैं, जिन्होंने उस समय शिक्षक के पद पर नौकरी ज्वाइन की थी, जब TET यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य नहीं थी। अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद इन शिक्षकों के लिए वर्ष 2028 के भीतर TET परीक्षा पास करना अनिवार्य किए जाने की बात सामने आई है। इसे लेकर शिक्षकों के एक बड़े वर्ग में नाराजगी है। उनका दावा है कि यदि उन्हें TET परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता लागू की जाती है, तो बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं की नौकरी पर खतरा पैदा हो सकता है।
TET परीक्षा की अनिवार्यता नहीं थी
इनमें मुख्य रूप से प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक शामिल हैं। आंदोलन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि जब उन्होंने नौकरी हासिल की थी, उस समय TET परीक्षा की अनिवार्यता नहीं थी। ऐसे में 20-25 वर्षों की सेवा के बाद उन पर नई परीक्षा की शर्त थोपना उचित नहीं है।
विकास भवन अभियान
इसी मांग को लेकर बुधवार शिक्षकों की ओर से विकास भवन अभियान का आह्वान किया। करुणामयी बस स्टैंड से शिक्षकों ने जुलूस निकालना शुरू होकर विकास भवन तक जाने लगा, तभी पुलिस ने उन लोगों को मयुख भवन के पास रोक दिया। इसके बाद शिक्षकों के एक प्रतिनिधि मंडल ने विकास भवन एवं एसएससी कार्यालय में ज्ञापन सौपा।
शिक्षकों की प्रमुख मांग
शिक्षकों की प्रमुख मांग है कि जिन लोगों ने TET की अनिवार्यता लागू होने से पहले नियमों के अनुसार शिक्षक की नौकरी हासिल की थी, उन्हें नई व्यवस्था के तहत TET परीक्षा पास करने के लिए बाध्य न किया जाए।
अब देखना होगा कि शिक्षकों के इस आंदोलन के बाद राज्य सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है और हजारों शिक्षकों की नौकरी से जुड़े इस मुद्दे पर क्या समाधान निकलता है।































