30 से 90 साल तक के मरीजों का इलाज
हावड़ा : पश्चिम बंगाल के हावड़ा में रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि सामने आई है। नारायणा हॉस्पिटल, हावड़ा में एक ही दिन में लगातार नौ रोबोटिक सर्जरी की गईं। अस्पताल के मुताबिक, इन ऑपरेशनों में सबसे बुजुर्ग मरीज की उम्र 90 वर्ष और सबसे युवा मरीज की उम्र 30 वर्ष थी। अलग-अलग उम्र और अलग-अलग बीमारी वाले इन मरीजों के इलाज में रोबोटिक सर्जरी तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
सभी सर्जरी 4th Generation da Vinci Robotic System के जरिए की गईं। अस्पताल के कंसल्टेंट जनरल, लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी डॉ. शशांक शुक्ला और उनकी टीम ने इन प्रक्रियाओं को पूरा किया।
गॉल ब्लैडर से लेकर हर्निया और अपेंडिक्स तक की सर्जरी
अस्पताल के अनुसार, एक ही दिन में की गई नौ रोबोटिक सर्जरी में जनरल सर्जरी की अलग-अलग प्रक्रियाएं शामिल थीं। इनमें रोबोटिक कोलेसिस्टेक्टोमी, यानी गॉल ब्लैडर निकालने की सर्जरी, रोबोटिक हर्निया रिपेयर और रोबोटिक अपेंडेक्टोमी शामिल थीं।
हर्निया के मामलों में भी मरीजों की स्थिति अलग-अलग थी। इनमें ग्रोइन क्षेत्र का इंग्वाइनल हर्निया और पेट की दीवार से जुड़ा वेंट्रल हर्निया शामिल था। अस्पताल के मुताबिक, अलग-अलग तरह के मामलों को एक ही दिन में रोबोटिक तकनीक से संभालना टीम के लिए महत्वपूर्ण अनुभव रहा।
डॉ. शशांक शुक्ला ने कहा कि हर मरीज की चिकित्सकीय जरूरत अलग होती है। उनके अनुसार, टीम का मुख्य उद्देश्य मरीज की स्थिति और जरूरत के आधार पर उचित सर्जिकल तरीका चुनना है।
‘नंबर कभी मकसद नहीं था’
एक दिन में नौ रोबोटिक सर्जरी को मीडिया रिपोर्टों में रिकॉर्ड के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, डॉ. शुक्ला का कहना है कि संख्या उनके लिए मुख्य लक्ष्य नहीं थी।
उन्होंने कहा कि एक दिन में नौ रोबोटिक सर्जरी करना टीम के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव जरूर है, लेकिन इसका उद्देश्य सिर्फ कोई रिकॉर्ड बनाना नहीं था। उनके मुताबिक, इसके जरिए यह दिखाना भी था कि पिछले कुछ वर्षों में रोबोटिक सर्जरी की मांग किस तरह बढ़ी है।
डॉ. शुक्ला पिछले करीब चार वर्षों से रोबोटिक सर्जरी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसी सप्ताह आठ अन्य रोबोटिक सर्जरी भी की गईं और लगभग हर दिन एक-दो रोबोटिक केस सामने आए। उनके मुताबिक, सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब मरीज खुद रोबोटिक सर्जरी के बारे में जानकारी लेने लगे हैं।
युवा सर्जनों के लिए बना सीखने का मंच
इस पहल का एक उद्देश्य युवा सर्जनों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को रोबोटिक सर्जरी की प्रक्रिया को समझने का अवसर देना भी था। डॉ. शुक्ला के अनुसार, टीम ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करना चाहती है, जहां पूर्वी भारत के युवा सर्जन और अन्य चिकित्सक आकर आधुनिक रोबोटिक तकनीक के इस्तेमाल को करीब से देख सकें।
30 से 90 वर्ष तक के मरीजों पर एक ही दिन में की गई नौ अलग-अलग प्रक्रियाओं ने इस तकनीक के विभिन्न उपयोगों को समझने का अवसर दिया।
एक सर्जन का काम नहीं
अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर अजित कुमार बेल्लमकोंडा ने कहा कि एक दिन में नौ रोबोटिक सर्जरी किसी एक सर्जन के प्रयास से संभव नहीं होती। इसके लिए सर्जिकल टीम के साथ एनेस्थीसिया, नर्सिंग और सपोर्ट स्टाफ के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होता है।
उन्होंने कहा कि नौ प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए पूरी टीम के समन्वित प्रयास की जरूरत पड़ी। उनके अनुसार, यह अस्पताल की आधुनिक सर्जिकल सुविधाओं और क्षमताओं को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रोबोट ऑपरेशन नहीं करता, सर्जन ही रहता है नियंत्रण में
रोबोटिक सर्जरी को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या रोबोट खुद ऑपरेशन करता है। दरअसल, da Vinci सिस्टम में सर्जन कंसोल पर बैठकर रोबोटिक आर्म्स को नियंत्रित करता है। इन आर्म्स में कैमरा और सर्जिकल उपकरण लगे होते हैं, जिन्हें छोटे चीरे के जरिए मरीज के शरीर के अंदर पहुंचाया जाता है।
डॉ. शुक्ला के मुताबिक, यह तकनीक सर्जन को बेहतर विजुअलाइजेशन और नियंत्रण उपलब्ध कराती है, लेकिन ऑपरेशन का नियंत्रण सर्जन के हाथ में ही रहता है। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ करते हुए सुरक्षित और प्रभावी सर्जिकल केयर देना टीम का लक्ष्य है।
डॉ. शुक्ला ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड बनाना कभी उनका उद्देश्य नहीं था। हालांकि, अगर इस उपलब्धि को रिकॉर्ड के रूप में देखा जाता है, तो भविष्य में अपने ही रिकॉर्ड को बेहतर करना उन्हें खुशी देगा।































