बंगाल समेत 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में नए वोटरों को राहत
कोलकाता : चुनाव आयोग ने नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में हाल में किए गए बदलाव को वापस ले लिया है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल समेत उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पुराने फॉर्मेट को फिर से उपलब्ध कराया गया है, जहां Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर फिलहाल नए वोटरों के लिए Form 6 उपलब्ध है।
नए वोटरों को अब SIR से जुड़ी जानकारी देने की जरूरत नहीं
पहले Form 6 में SIR से जुड़े कुछ सवाल शामिल किए गए थे। इनमें आवेदक से यह जानकारी मांगी जा रही थी कि उसका या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली SIR वोटर लिस्ट में दर्ज था या नहीं।
अगर नाम दर्ज होने की जानकारी दी जाती थी, तो संबंधित बूथ और सीरियल नंबर जैसी जानकारी भी मांगी जाती थी। अब जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है, वहां नए मतदाताओं के लिए यह अतिरिक्त जानकारी देने की आवश्यकता नहीं होगी।
13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पुराने फॉर्मेट की वापसी
चुनाव आयोग ने शनिवार को स्पष्ट किया था कि जहां Special Summary Revision (SSR) नहीं चल रहा है या प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां Registration of Electors Rules, 1960 के तहत Form 6 उपलब्ध रहेगा।
इसके बाद आयोग के ECINET पोर्टल पर Form 6 के पुराने स्वरूप को फिर से उपलब्ध कराया गया। आयोग के मौजूदा नागरिक सेवा पोर्टल पर भी नए वोटर के रजिस्ट्रेशन के लिए Form 6 का विकल्प मौजूद है।
वहीं, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अभी जारी है, वहां Form 6 में SIR से संबंधित प्रावधान लागू रहने की जानकारी दी गई है।
दो चुनाव आयुक्तों ने Form 6 में बदलाव पर जताई थी आपत्ति
Form 6 में किए गए बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी आपत्तियां सामने आई थीं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form 6 में SIR से संबंधित सवाल जोड़े जाने पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में दोनों आयुक्तों द्वारा आयोग के फैसलों पर कई मौकों पर आपत्ति दर्ज कराने का भी उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, संधू ने इस बदलाव को कानून में जरूरी संशोधन किए बिना लागू किए जाने पर सवाल उठाया था। उन्होंने इसे हटाने की मांग भी की थी। द इंडियन एक्सप्रेस ने दोनों आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर संबंधित दस्तावेजों के आधार पर रिपोर्ट प्रकाशित की है।
बिहार से शुरू हुआ था Form 6 में बदलाव
रिपोर्ट के अनुसार, Form 6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी शामिल करने की शुरुआत बिहार में हुई थी। इसके बाद नए मतदाताओं से पिछली SIR सूची में अपने या परिवार के सदस्यों के नाम की जानकारी मांगी गई।
इस व्यवस्था में आवेदकों को यह बताना होता था कि उनका नाम, माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR मतदाता सूची में मौजूद है या नहीं। नाम मिलने की स्थिति में बूथ और क्रम संख्या जैसी जानकारी भी मांगी जाती थी।
SIR प्रक्रिया अभी भी कई राज्यों में जारी
चुनाव आयोग ने 2026 में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया शुरू की है। आयोग के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, अलग-अलग चरणों में राज्यों के लिए SIR की समयसीमा तय की गई है।
ऐसे में Form 6 में बदलाव वापस लेने का फैसला नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अब SIR पूरा कर चुके राज्यों में नए वोटरों को पुराने प्रारूप के अनुसार Form 6 भरना होगा, जबकि SIR प्रक्रिया वाले क्षेत्रों में संबंधित नियम लागू रहेंगे।





























