चोरी के मामले में चार दिन की पुलिस हिरासत में था 20 वर्षीय राहुल रुईदास
पश्चिम मेदिनीपुर : पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना पुलिस स्टेशन में पुलिस हिरासत में एक युवक की मौत हो गई। चोरी के मामले में गिरफ्तार 20 वर्षीय राहुल रुईदास ने रविवार को थाने के रेस्टरूम में फांसी लगाने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिवार ने लगाया हत्या का आरोप
राहुल के परिवार ने पुलिस के दावे पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि उसकी हत्या की गई। मृतक के भाई का कहना है कि पुलिस अधिकारी घटना को लेकर अलग-अलग बातें बता रहे हैं। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
चार दिन की पुलिस हिरासत में था राहुल
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, चंद्रकोना के बागेश्वरपुर इलाके का रहने वाला राहुल चोरी के एक मामले में गिरफ्तार हुआ था। उसे घाटल अनुमंडल अदालत में पेश किया गया था, जहां से उसे चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।
रविवार को हिरासत के दौरान वह पुलिस स्टेशन के रेस्टरूम में गया। पुलिस का दावा है कि उसने अपनी पहनी हुई पतलून के सहारे फांसी लगाने की कोशिश की। अंदर से आवाज आने के बाद पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और उसे बेहोशी की हालत में बाहर निकाला।
अस्पताल में इलाज के दौरान मौत
राहुल को पहले चंद्रकोना ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया। हालत बिगड़ने पर उसे घाटल अनुमंडलीय अस्पताल भेजा गया, जहां उसकी मौत हो गई।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, राहुल नशे का आदी था और चोरी तथा झपटमारी जैसे मामलों में शामिल रहा था। हालांकि, उसकी हिरासत में हुई मौत को लेकर परिवार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
पश्चिम बंगाल में हाल के दिनों में पुलिस हिरासत में मौत और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। अगस्त में कांचरापाड़ा नगरपालिका की पूर्व तृणमूल पार्षद जेनी शर्मा केओट के पति की पुलिस हिरासत में मौत हुई थी। परिवार ने लॉक-अप में मारपीट का आरोप लगाया था। इस मामले में CID जांच के आदेश दिए गए और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
इसके अलावा सोनारपुर दुष्कर्म-हत्या मामले के मुख्य आरोपी प्रभास मंडल की पुलिस मुठभेड़ में मौत को लेकर भी सवाल उठे थे। राज्य पुलिस की CID को इस मामले की जांच सौंपी गई है। चंद्रकोना की घटना ने एक बार फिर पुलिस हिरासत में आरोपियों की सुरक्षा और पुलिस निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।































