कलकत्ता हाई कोर्ट ने दी अनुमति
कोलकाता : दुर्गापूजा की पंचमी पर वामपंथी दलों को बड़ी राहत मिली है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के बनगांव में जेसोर रोड पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) को बुकस्टॉल लगाने की अनुमति दे दी है। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि पूजा पंडाल से 100 मीटर के दायरे में भी बुकस्टॉल लगाया जा सकता है। हालांकि, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात करना होगा। अदालत ने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट देने का भी निर्देश दिया है।
यह मामला दुर्गापूजा के दौरान CPM के पारंपरिक पुस्तक स्टॉल लगाने की अनुमति से जुड़ा था। पार्टी की ओर से दलील दी गई कि पिछले 63 वर्षों से संबंधित स्थान पर बुकस्टॉल लगाए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार अनुमति देने में बाधा उत्पन्न की गई।
दूसरों को स्टॉल की अनुमति, तो CPM को क्यों नहीं
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब दूसरे लोगों और संस्थाओं को स्टॉल लगाने की अनुमति दी गई है, तो CPM को किताबें बेचने से क्यों रोका जा रहा है।
न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं को महत्व देना लोकतंत्र के लिए लाभदायक है। जब दूसरे लोग स्टॉल लगाकर विभिन्न वस्तुएं बेच सकते हैं, तो आवेदकों को पुस्तकें बेचने की अनुमति नहीं देना उचित नहीं है। अदालत ने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस लोकतांत्रिक पहलू पर ध्यान देगा।
अदालत की टिप्पणी के बाद CPM को बनगांव के जेसोर रोड पर बुकस्टॉल लगाने की अनुमति मिल गई। साथ ही, पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी इंतजाम करने को कहा गया।
CPM की ओर से बिकाशरंजन भट्टाचार्य ने रखी दलील
CPM की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बिकाशरंजन भट्टाचार्य ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह मामला जमीन के स्वामित्व या किसी अन्य की संपत्ति पर निर्माण करने से संबंधित विवाद नहीं है। उनके मुताबिक, आवेदक एक नागरिक और राजनीतिक दल के रूप में अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत पहुंचे हैं।
उन्होंने दलील दी कि मामले का मुख्य सवाल कानून-व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करने का है। इस दौरान न्यायाधीश ने संबंधित इलाके के आसपास बड़े दुर्गापूजा पंडालों की मौजूदगी और बुकस्टॉल से संभावित समस्याओं के बारे में जानकारी मांगी। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि इलाके में अन्य किन संगठनों को स्टॉल लगाने की अनुमति दी गई है।
राज्य सरकार ने उठाया अनुमति और निर्माण का सवाल
राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ने दलील दी कि यदि कोई व्यक्ति अचानक किसी दूसरे की संपत्ति पर निर्माण करने का दावा करे और पुलिस सुरक्षा मांगे, तो प्रशासन को किस तरह कार्रवाई करनी चाहिए। सरकार का कहना था कि किसी भी गतिविधि को कानूनी रूप से संचालित करने के लिए जरूरी अनुमति लेना अनिवार्य है।
एडवोकेट जनरल ने यह भी कहा कि सरकार संबंधित स्थान पर अस्थायी निर्माण की अनुमति नहीं दे सकती और पुलिस ऐसे निर्माण के लिए सुरक्षा देने के लिए बाध्य नहीं है।
सरकार की दलीलों पर न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि नियमों के उल्लंघन के आधार पर सभी अवैध निर्माण हटाने की बात कही जाती है, तो फिर बुलडोजर या जेसीबी चलाकर सभी अस्थायी निर्माण तोड़ दिए जाने चाहिए, ताकि कहीं भी इस तरह के निर्माण न रहें।
63 साल पुरानी परंपरा का दिया गया हवाला
CPM की ओर से यह भी बताया गया कि संबंधित स्थान पर पिछले 63 वर्षों से पुस्तक स्टॉल लगाए जाते रहे हैं। अदालत ने इस परंपरा और अन्य संगठनों को मिली अनुमति के संदर्भ में सवाल उठाया कि फिर CPM के स्टॉल पर रोक लगाने का औचित्य क्या है।
अदालत के आदेश के बाद अब बनगांव के जेसोर रोड पर CPM का बुकस्टॉल लगाया जा सकेगा। हालांकि, इस दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी और पुलिस अधीक्षक को इस संबंध में रिपोर्ट भी देनी होगी।
दुर्गापूजा के दौरान राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के बीच अदालत का यह फैसला वामपंथी दल के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। इससे पुस्तक स्टॉल लगाने को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल समाप्त होता दिख रहा है।































