अलीपुरद्वार : पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार स्थित बक्सा टाइगर रिजर्व में शुक्रवार को एक नई शुरुआत हुई। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने टाइगर रीइंट्रोडक्शन प्रोग्राम के तहत रिजर्व में पहली बाघिन को छोड़ा। यह बाघिन बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाई गई है। इसे बक्सा में दोबारा बाघों की आबादी स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
करीब तीन साल की इस रॉयल बंगाल टाइग्रेस को कुछ दिन पहले वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सुरक्षित तरीके से पकड़ा गया था। इसके बाद उसे विमान के जरिए पश्चिम बंगाल के हासीमारा एयरबेस लाया गया और फिर बक्सा टाइगर रिजर्व के निर्धारित क्षेत्र में पहुंचाया गया। वहां पशु चिकित्सकों और वन अधिकारियों की निगरानी में उसके स्वास्थ्य और व्यवहार की जांच की गई।
बक्सा में लंबे समय बाद बाघों की वापसी
बक्सा टाइगर रिजर्व में लंबे समय से स्थायी बाघ आबादी नहीं थी। अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले कैमरा ट्रैप में एक बाघ की मौजूदगी दर्ज की गई थी, जिसके भूटान या असम के मानस नेशनल पार्क से आने की संभावना जताई गई थी। ऐसे में वाल्मीकि से बाघिन को लाकर यहां पुनर्वासित करना बक्सा में स्थायी बाघ आबादी विकसित करने की योजना का हिस्सा है।
वन विभाग के अनुसार, बाघिन को रेडियो कॉलर के जरिए ट्रैक किया जाएगा और कैमरा ट्रैप तथा अन्य वैज्ञानिक माध्यमों से उसकी गतिविधियों और व्यवहार पर नजर रखी जाएगी। शुरुआती चरण में उसका जंगल के वातावरण के साथ तालमेल बैठाना और शिकार करने की क्षमता को समझना महत्वपूर्ण होगा।
अगले दो महीनों में तीन और बाघ लाने की तैयारी
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि यह शुरुआत भर है। अगले दो महीनों में बक्सा टाइगर रिजर्व में तीन और बाघों को लाने की योजना है। वन मंत्री मनोज कुमार ओरांव के अनुसार, बक्सा में स्थायी और प्रजनन करने वाली बाघ आबादी विकसित करने में समय लगेगा। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से और बाघों को यहां लाया जाएगा।
योजना के तहत केवल बाघों को लाकर छोड़ना ही उद्देश्य नहीं है। बक्सा में उनके लिए पर्याप्त शिकार आधार तैयार करने, प्राकृतिक आवास को मजबूत करने, वन्यजीव गलियारों को सुरक्षित करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने पर भी काम किया जा रहा है। यह पूरा कार्यक्रम वर्ष 2023-24 से 2027-28 के लिए निर्धारित पांच वर्षीय परियोजना का हिस्सा है।
पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की वापसी का असर उत्तर बंगाल के पर्यटन पर भी पड़ने की उम्मीद है। डूआर्स क्षेत्र पहले से ही जंगल और वन्यजीव पर्यटन के लिए लोकप्रिय है। राज्य के वन मंत्री के अनुसार, बाघों की मौजूदगी से इस क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आजीविका के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने बक्सा के आसपास प्राकृतिक संसाधनों के विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने की बात भी कही। उन्होंने बताया कि जयन्ती वन क्षेत्र और असम के मानस नेशनल पार्क से सटे गहरे जंगल में लगभग 2,000 एकड़ क्षेत्र की पहचान कर उसे विश्वस्तरीय वन पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
वैज्ञानिक निगरानी के साथ आगे बढ़ेगा प्रोजेक्ट
बाघ पुनर्वास कार्यक्रम के लिए बक्सा में पहले से ही कई तैयारियां की गई हैं। वन विभाग ने प्रशिक्षित हाथियों को भी यहां पहुंचाया है, जिनका इस्तेमाल घने जंगल में निगरानी और वन्यजीव प्रबंधन के दौरान किया जा सकता है। बाघिन को छोड़े जाने के बाद उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की वापसी का यह अभियान केवल एक बाघिन को जंगल में छोड़ने तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य एक सुरक्षित और टिकाऊ बाघ आबादी के लिए उपयुक्त पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। आने वाले वर्षों में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ बक्सा के जंगलों में जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।































