बस मालिक संगठनों ने ईंधन, रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और कर्मचारियों की बढ़ी लागत का हवाला दिया; पुराने वाहन मामलों को लोक अदालत में निपटाने की मांग की
कोलकाता : बस किराया बढ़ाने की लंबे समय से चली आ रही मांग के बीच परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने आश्वासन दिया है कि पूजा उत्सव के बाद बस किराया बढ़ाने के मुद्दे पर विचार किया जाएगा। इसके बाद बस परिवहन क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने सरकार के सामने किराया पुनर्निर्धारण के साथ-साथ पुराने वाहन मामलों, जुर्माने और सरकारी शुल्क से जुड़े कई मुद्दे उठाए हैं।
2026 की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप हो किराया
सिटी सबअर्बन बस सर्विस के महासचिव टीटो साहा ने कहा कि बस किराया तय करते समय यात्रियों की क्षमता और बस संचालन की वास्तविक लागत के बीच संतुलन बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, 2021 में एक विशेषज्ञ समिति ने बस किराये की उपयुक्त संरचना का आकलन किया था। उस समय ईंधन की कीमतें मौजूदा स्तर की तुलना में काफी कम थीं।
इसके बाद 2022 में किराया पुनर्गठन के मुद्दे पर एक फेयर रिऑर्गनाइजेशन कमेटी गठित की गई थी। बस संगठनों का कहना है कि उस समय की आय से संबंधित दो रिपोर्टों को आधार बनाकर मौजूदा स्थिति का फिर से आकलन किया जा सकता है।
संगठन चाहता है कि 2026 में ईंधन, बसों के रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स, कर्मचारियों के वेतन और दूसरे परिचालन खर्चों में हुई बढ़ोतरी को ध्यान में रखकर वैज्ञानिक और व्यावहारिक किराया ढांचा तैयार किया जाए।
पुराने पुलिस मामलों को लेकर भी राहत की मांग
सम्मेलन में बस मालिकों के खिलाफ दर्ज पुलिस मामलों और लगाए गए जुर्माने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। बस संगठनों ने कहा कि वाहन नियमों का पालन और कानून का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है, लेकिन वर्तमान आय और परिचालन खर्च को देखते हुए जुर्माने की राशि और कानून के अनुपालन को लेकर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
संगठनों ने सरकार से पुराने वाहन संबंधी मामलों को वापस लेने या उनकी दोबारा समीक्षा करने का अनुरोध किया है। यदि मामलों को वापस लेना संभव नहीं है, तो उन्हें लोक अदालत के माध्यम से निपटाने की व्यवस्था करने की मांग की गई है।
टैक्स और फिटनेस फीस पर भी उठी बात
बस मालिकों ने स्पष्ट किया कि उन्हें टैक्स, सीएफ यानी सर्टिफिकेट ऑफ फिटनेस फीस और अन्य सरकारी शुल्क का भुगतान करने में आपत्ति नहीं है। हालांकि, इन शुल्कों से जुड़े अतिरिक्त जुर्माने बसों की मौजूदा आय के अनुपात में होने चाहिए।
बस संगठनों का कहना है कि कई मामलों में पुराने पुलिस केस और जमा जुर्माने के कारण वाहन से जुड़े जरूरी दस्तावेजों का समय पर नवीनीकरण कराना मुश्किल हो जाता है। इससे बसों का नियमित संचालन भी प्रभावित होता है।
ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर भी मांग
बस संगठनों ने सड़कों पर चलने वाले अलग-अलग प्रकार के सार्वजनिक परिवहन वाहनों की संख्या और सड़कों की क्षमता को ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक नियमों के प्रभावी प्रबंधन की मांग की है।
उनका कहना है कि बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन से यात्रियों को होने वाली अनावश्यक परेशानी कम की जा सकती है। साथ ही, इससे ट्रैफिक जाम और वाहनों से होने वाले अत्यधिक प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।
सरकार, बस मालिक और यात्रियों के बीच संवाद पर जोर
बस परिवहन को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित, टिकाऊ और यात्री-अनुकूल बनाने के लिए सरकार, बस मालिक संगठनों, परिवहन कर्मचारियों और यात्रियों के बीच नियमित संवाद और समन्वय को जरूरी बताया गया है।
बस संगठनों ने सरकार से अपील की है कि किराया पुनर्निर्धारण के साथ पुराने मामलों, जुर्माने, सरकारी शुल्क और ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि बस परिवहन क्षेत्र लंबे समय तक आर्थिक रूप से व्यवहार्य बना रहे और यात्रियों को भी सुचारु सार्वजनिक परिवहन सेवा मिलती रहे।































