क्या बीजेपी नेताओं की शिकायत लेकर गई थी मंत्री के पास, पुलिस कर रही है जांच
कोलकाता/हावड़ा : पश्चिम बंगाल के राज्य सचिवालय नबन्ना में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का सदस्य बताकर राज्य के लोक निर्माण मंत्री अजय पोद्दार से मिलने पहुंची आकांक्षा विद्यार्थी को पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि महिला ने अपनी पहचान गलत बताकर मंत्री से मुलाकात की और कूचबिहार के माथाभांगा में एक स्कूल के निर्माण में कथित बाधा डाल रहे स्थानीय बीजेपी नेताओं के खिलाफ शिकायत की। मामले में पुलिस यह जांच कर रही है कि महिला ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय का सदस्य क्यों बताया और उसके दावों में कितनी सच्चाई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आकांक्षा को शुक्रवार को ट्रांजिट रिमांड पर हावड़ा लाया गया। शिबपुर थाने के जांच अधिकारियों ने उससे पूछताछ की। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, उसे शनिवार, 3 अक्टूबर को हावड़ा अदालत में पेश किया जाना है।
कौन हैं आकांक्षा विद्यार्थी?
पूछताछ के दौरान करीब 40 वर्षीय अविवाहित आकांक्षा विद्यार्थी ने कथित तौर पर खुद को भारतीय जनसंघ के पूर्व सांसद राम स्वरूप विद्यार्थी की नातिन बताया। राम स्वरूप विद्यार्थी दिल्ली के करोल बाग से जुड़े थे और 1967 से 1971 के बीच भारतीय जनसंघ के सांसद रहे थे।
आकांक्षा ने पुलिस को बताया कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी हैं और देश के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक सेवा से संबंधित कार्य करती हैं। इसी सिलसिले में पश्चिम बंगाल में भी उनके कई परिचित हैं। हालांकि, उनके इन दावों और कथित राजनीतिक-सामाजिक संपर्कों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
माथाभांगा में स्कूल निर्माण को लेकर क्या है विवाद?
पुलिस को दिए गए अपने कथित बयान में आकांक्षा ने बताया कि आसनसोल के एक पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेता के रिश्तेदार कूचबिहार जिले के माथाभांगा में एक स्कूल का निर्माण करा रहे हैं। आरोप है कि स्थानीय बीजेपी के कुछ नेता इस काम में बाधा डाल रहे थे।
बताया जा रहा है कि स्कूल निर्माण में आ रही कथित परेशानियों को लेकर आसनसोल के उक्त नेता के रिश्तेदारों ने आकांक्षा से संपर्क किया था। इसके बाद आकांक्षा उन दो लोगों के साथ नबन्ना पहुंचीं और लोक निर्माण मंत्री अजय पोद्दार से मुलाकात की।
आकांक्षा ने कथित तौर पर मंत्री को बताया कि वह प्रधानमंत्री कार्यालय की सदस्य हैं। उन्होंने स्कूल निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए मंत्री से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। हालांकि, पुलिस अब यह पता लगा रही है कि स्कूल निर्माण को लेकर वास्तव में क्या विवाद है और क्या इस मामले में किसी राजनीतिक दबाव या हस्तक्षेप की भूमिका थी।
मंत्री को हुआ शक, दर्ज कराई शिकायत
मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि यदि आकांक्षा प्रधानमंत्री कार्यालय की सदस्य नहीं थीं, तो उन्होंने इस तरह का परिचय क्यों दिया। बताया जाता है कि मंत्री अजय पोद्दार को उनकी पहचान और एक स्थानीय विवाद में हस्तक्षेप करने के अनुरोध को लेकर संदेह हुआ।
आकांक्षा के नबन्ना से निकलने के बाद मंत्री ने उनकी पहचान के बारे में जानकारी जुटाई। इसके बाद कथित तौर पर पता चला कि उन्होंने अपनी पहचान गलत बताकर सचिवालय में प्रवेश किया था।
इसके बाद शिबपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
मोबाइल लोकेशन से दिल्ली पहुंची पुलिस
पुलिस सूत्रों के अनुसार, बुधवार रात शिकायत मिलने के बाद जांच अधिकारियों ने आकांक्षा द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर की लोकेशन ट्रैक करनी शुरू की। जांच में कथित तौर पर पता चला कि वह बुधवार रात दिल्ली जाने वाली फ्लाइट में सवार हो गई थीं।
इसके बाद शिबपुर थाने की पुलिस टीम दिल्ली पहुंची और गुरुवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया। बाद में उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर हावड़ा लाया गया।
दो अन्य लोगों की भी तलाश
जिस दिन आकांक्षा नबन्ना पहुंची थीं, उस दिन उनके साथ दो अन्य लोग भी मौजूद थे। पुलिस अब उन दोनों की तलाश कर रही है, ताकि स्कूल निर्माण से जुड़े विवाद, मंत्री से मुलाकात और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों को स्पष्ट किया जा सके। फिलहाल पुलिस की जांच के मुख्य बिंदु हैं—PMO का कथित फर्जी परिचय देने का आरोप, नबन्ना में प्रवेश की परिस्थितियां, स्कूल निर्माण विवाद और आकांक्षा के साथ आए दोनों लोगों की भूमिका। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालत की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगा।






























