WhatsApp स्क्रीनशॉट के जरिए 30 लाख वोटरों के नाम हटाने की साजिश का आरोप
नई दिल्ली/कोलकाता: चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर कथित मतभेदों की खबरों के बीच तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर फिर निशाना साधा है। गुरुवार को अभिषेक ने सोशल मीडिया पर अप्रैल की एक WhatsApp चैट के स्क्रीनशॉट साझा किए और दावा किया कि इसमें मतदाता सूची से करीब 30 लाख नाम हटाने की कथित योजना को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।
अभिषेक ने पोस्ट में दावा किया कि यह चुनाव पर्यवेक्षकों के WhatsApp ग्रुप का स्क्रीनशॉट है। उनके मुताबिक, इससे यह सवाल उठता है कि क्या मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाने की कोई पूर्व नियोजित प्रक्रिया चल रही थी। उन्होंने कहा कि इस मामले को दबाया नहीं जा सकता और देश की जनता इसके जवाब की मांग करेगी।
EC के अंदर मतभेद की खबरों पर सियासी हमला
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब चुनाव आयोग के दो सदस्यों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—की ओर से पिछले 10 महीनों में आयोग के कई फैसलों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, इन आपत्तियों में SIR, नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 में बदलाव, चुनावी डेटा के प्रबंधन और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े अपील मामलों सहित कई मुद्दे शामिल थे।
अभिषेक बनर्जी ने इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तथा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है।
SIR को लेकर भी लगाए गंभीर आरोप
अभिषेक ने आरोप लगाया कि Special Intensive Revision यानी SIR के जरिए पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल एक खास राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों और आयोग में किसी तरह के संस्थागत टूट की धारणा को खारिज किया है। ECI के अनुसार, बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और आपत्तियां आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा हैं और आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
पश्चिम बंगाल में SIR पर पहले से विवाद
पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच पहले से विवाद चल रहा है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि SIR के दौरान हटाए गए 27.16 लाख मतदाताओं में से 22 लाख से अधिक ने नाम बहाल कराने के लिए अपील की है। आयोग ने नाम हटाए जाने के पीछे मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं समेत विभिन्न कारणों का उल्लेख किया है।
ऐसे में अभिषेक बनर्जी के नए WhatsApp स्क्रीनशॉट ने SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अब इस पूरे मामले में सामने आए दस्तावेजों, आयोग के जवाब और अदालतों में होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी।
































