कोलकाता : दिवाली खुशियों, रोशनी और उत्सव का त्योहार है, लेकिन पटाखों का धुआं, आग से होने वाली दुर्घटनाएं, सड़क हादसे और खानपान में लापरवाही त्योहार के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकती हैं। ऐसे में थोड़ी-सी सावधानी और समय पर मेडिकल सहायता किसी बड़ी दुर्घटना को गंभीर स्थिति में बदलने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कोलकाता के पीयरलेस हॉस्पिटल ने दिवाली के मद्देनजर लोगों से सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाने और मेडिकल इमरजेंसी के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की है।
पीयरलेस हॉस्पिटल के इमरजेंसी एवं ट्रॉमेटोलॉजी सर्विसेज के प्रमुख डॉ. इंद्रनील दासगुप्ता ने समय पर चिकित्सा सहायता, आपातकालीन तैयारियों और त्योहार के दौरान बचाव के उपायों के महत्व पर जोर दिया है।
दिवाली पर पटाखों से जलने और आंखों में चोट का खतरा
दिवाली के दौरान पटाखों के इस्तेमाल से जलने, आंखों में चोट लगने और सांस संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। पटाखों का धुआं और प्रदूषण अस्थमा तथा अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों की परेशानी बढ़ा सकते हैं।
अस्पताल की सलाह के मुताबिक, पटाखे जलाते समय सुरक्षित दूरी बनाए रखें और बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें। दीये, मोमबत्तियां और पटाखे ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें। सांस लेने में गंभीर परेशानी या आंखों में चोट लगने की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
जलने पर क्या करें?
प्रभावित हिस्से को ठंडे बहते पानी के नीचे ठंडा करें। जले हुए स्थान पर बर्फ, तेल, घी या टूथपेस्ट न लगाएं। गंभीर जलन या चेहरे और सांस की नली के आसपास चोट होने पर तत्काल मेडिकल सहायता लें।
हार्ट अटैक और स्ट्रोक के लक्षणों को न करें नजरअंदाज
त्योहारों के दौरान देर रात तक जागना, थकान, अनियमित दिनचर्या और खानपान में बदलाव पहले से बीमार लोगों की परेशानी बढ़ा सकते हैं। ऐसे में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के शुरुआती संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है।
हार्ट अटैक : सीने में दर्द या दबाव, सांस फूलना, अत्यधिक पसीना, मतली या हाथ, पीठ और जबड़े में असहजता होने पर तुरंत इमरजेंसी सहायता लें।
स्ट्रोक : अचानक चेहरा टेढ़ा होना, हाथ-पैर में कमजोरी, बोलने में परेशानी या संतुलन बिगड़ना स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। लक्षण ठीक होने का इंतजार न करें।
सांस की परेशानी : पटाखों के धुएं के बीच अचानक सांस फूलना, होंठ नीले पड़ना या बोलने में परेशानी होना गंभीर संकेत हैं और तत्काल चिकित्सा जांच की जरूरत हो सकती है।
डॉ. इंद्रनील दासगुप्ता के अनुसार, मेडिकल इमरजेंसी में समय पर जांच और उपचार मरीज के परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। ट्रॉमा के मामलों में शुरुआती उपचार की अहमियत को ‘गोल्डन ऑवर’ की अवधारणा भी रेखांकित करती है।
दिवाली पर सड़क हादसों से बचने के लिए बरतें सावधानी
दिवाली के दौरान बाजारों और सड़कों पर भीड़ बढ़ने के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है। वाहन चलाते समय हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल करें, तेज गति से बचें और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग न करें। शराब पीकर या थकान की स्थिति में वाहन न चलाएं।
भीड़भाड़ वाली जगहों पर बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। घर तथा सार्वजनिक स्थानों पर गीले फर्श, सीढ़ियों और बिजली के तारों के आसपास सावधानी बरतें।
दिवाली पर खानपान और दवाओं का रखें ध्यान
त्योहारों में मिठाइयों, तले-भुने खाद्य पदार्थों और भारी भोजन का सेवन बढ़ जाता है। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को अपने खानपान और निर्धारित दवाओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
पर्याप्त पानी पिएं, स्वच्छ भोजन का सेवन करें और लंबे समय तक बाहर रहने पर बीच-बीच में आराम करें। यात्रा के दौरान जरूरी दवाएं और मेडिकल रिकॉर्ड साथ रखें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेने से बचें।
मेडिकल इमरजेंसी में देरी पड़ सकती है भारी
अगर कोई व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाए, गंभीर रूप से घायल हो या सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो, तो तुरंत आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करें। प्रशिक्षित होने पर सीपीआर (CPR) शुरू करें और आपातकालीन ऑपरेटर के निर्देशों का पालन करें।
गंभीर चोट, अत्यधिक रक्तस्राव, सिर में चोट या हड्डी टूटने की आशंका को हल्के में न लें। रीढ़ की हड्डी में चोट का संदेह होने पर घायल व्यक्ति को अनावश्यक रूप से न हिलाएं।
पीयरलेस हॉस्पिटल की इमरजेंसी एवं ट्रॉमेटोलॉजी सेवाएं तेजी से मरीज का आकलन, उचित उपचार और विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच समन्वय के महत्व पर जोर देती हैं।
सुरक्षित दिवाली मनाएं
दिवाली का त्योहार खुशियों और रोशनी का प्रतीक है। पटाखों के इस्तेमाल में सावधानी, जिम्मेदारी से वाहन चलाने, संतुलित खानपान और स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी के संकेतों को पहचानने से कई संभावित हादसों से बचा जा सकता है।































