AI की मदद से बनाया फर्जी पुलिस पहचान पत्र
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के निमता इलाके में खुद को पुलिसकर्मी बताने के आरोप में 24 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से फर्जी पुलिस पहचान पत्र तैयार किया था। शुक्रवार रात बेलघरिया एक्सप्रेसवे के जीरो पॉइंट के पास हुई इस घटना के बाद दमदम थाने की पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि युवक ने फर्जी पहचान पत्र किस उद्देश्य से बनाया था।
पुलिसकर्मियों को युवक के व्यवहार पर हुआ संदेह
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार युवक की पहचान नूर इस्लाम के रूप में हुई है। शुक्रवार रात वह कथित तौर पर खुद को पुलिसकर्मी बताकर निमता ट्रैफिक गार्ड में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के पास पहुंचा। उसने पुलिसकर्मियों से घर लौटने के लिए एक गाड़ी की व्यवस्था करने का अनुरोध किया।
हालांकि, युवक की बातचीत और उसके व्यवहार से ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने उससे पहचान पत्र दिखाने को कहा। युवक ने जब अपना पहचान पत्र प्रस्तुत किया, तो पुलिसकर्मियों को उसकी प्रामाणिकता पर शक हुआ।
स्कैन करते ही सामने आया फर्जीवाड़ा
संदेह होने पर पुलिसकर्मियों ने पहचान पत्र को स्कैन कर उसकी जांच की। जांच के दौरान पहचान पत्र कथित तौर पर फर्जी पाया गया। इसके बाद युवक से पूछताछ शुरू की गई।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान नूर इस्लाम ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक की मदद से फर्जी पहचान पत्र तैयार किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए दमदम थाने को इसकी सूचना दी गई।
सूचना मिलने के बाद दमदम थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को गिरफ्तार कर लिया।
AI से फर्जी पहचान पत्र बनाने के पीछे क्या था मकसद?
इस मामले में पुलिस अब कई पहलुओं की जांच कर रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि युवक ने खुद को पुलिसकर्मी बताने के लिए फर्जी पहचान पत्र क्यों बनाया था। क्या उसका उद्देश्य केवल घर लौटने के लिए गाड़ी हासिल करना था, या फिर वह किसी अन्य मकसद से अपनी कथित फर्जी पहचान का इस्तेमाल करना चाहता था?
फिलहाल, युवक की मंशा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस उसके कथित उद्देश्य और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के बाद ही मामले में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
यह घटना AI तकनीक के दुरुपयोग को लेकर भी सवाल खड़े करती है। तकनीक की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोपों की जांच में उनकी प्रामाणिकता और इस्तेमाल के उद्देश्य का पता लगाना महत्वपूर्ण है।































