कोलकाता : उत्तर कोलकाता के ऐतिहासिक चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा पंडाल में सप्तमी की शाम हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत के बाद पूरे पश्चिम बंगाल में शोक का माहौल है। हादसे के कारणों और संभावित लापरवाही की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है। इस बीच, पंडाल में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन को लेकर बना असमंजस अब दूर हो गया है। कोलकाता पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दुर्घटनास्थल को सुरक्षित रखते हुए निर्धारित नियमों के अनुसार प्रतिमा विसर्जन किया जाएगा।
पुलिस आयुक्त अजय नंदा के मुताबिक, चोरबागान पूजा समिति ने प्रतिमा विसर्जन की अनुमति मांगी थी। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद विसर्जन की प्रक्रिया के लिए अनुमति दी गई है। हालांकि, इसके लिए तय दिशा-निर्देशों और समयसीमा का पालन करना अनिवार्य होगा।
दुर्घटनास्थल से नहीं हटाए जाएंगे अहम सबूत
चोरबागान हादसे की जांच कर रही एसआईटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रतिमा विसर्जन के दौरान घटनास्थल को सुरक्षित रखना है। जांच दल का कहना है कि जिस जगह दुर्घटना हुई, उसे अपराधस्थल के रूप में संरक्षित रखते हुए ही विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
कलकत्ता हाई कोर्ट के परामर्श से गठित विशेष जांच दल हादसे के कारणों का पता लगाने में जुटा है। जांच के दौरान घटनास्थल पर मौजूद परिस्थितियों और संभावित साक्ष्यों को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशाल प्रतिमा निकालने के लिए पंडाल का हिस्सा तोड़ने की तैयारी
प्रतिमा विसर्जन की तैयारियों के बीच एक तकनीकी समस्या भी सामने आई है। हादसे के बाद पंडाल का निकास द्वार बंद रखा गया है। ऐसे में मां दुर्गा की विशाल प्रतिमा को बाहर निकालने के लिए सामने वाले मुख्य द्वार का इस्तेमाल करना होगा।
हालांकि, प्रतिमा के आकार को देखते हुए पंडाल के सामने के हिस्से को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए उसे बाहर निकालना मुश्किल बताया जा रहा है। इसी वजह से सामने की संरचना के कुछ हिस्से को हटाने या तोड़ने की जरूरत पड़ सकती है।
इस काम को सुरक्षित तरीके से अंजाम देने के लिए शुक्रवार को मूर्तिकार सुशांत शिवानी पाल को पंडाल में बुलाया गया है। उनसे प्रतिमा को बाहर निकालने के संभावित रास्ते और पंडाल के किस हिस्से को हटाना उचित होगा, इस पर तकनीकी चर्चा की जाएगी।
17 अक्टूबर के हादसे की जांच में जुटी एसआईटी
17 अक्टूबर को चोरबागान पंडाल में हुई दुर्घटना की तह तक पहुंचना एसआईटी की प्रमुख जिम्मेदारी है। जांच दल यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और क्या इसके पीछे किसी तरह की लापरवाही थी।
जांच में कई अहम पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है:
- भीड़ का दबाव: क्या पंडाल की निर्धारित क्षमता से अधिक लोग एकत्र हुए थे?
- हादसे का समय और स्थान: दुर्घटना ठीक कब और पंडाल के किस हिस्से में हुई?
- बारिश का प्रभाव: क्या उस दिन बारिश के कारण स्थिति बिगड़ी थी?
- अफवाहों की भूमिका: क्या पंडाल गिरने की अफवाह फैलने से लोगों में भगदड़ मची?
- व्यवस्थाओं की जांच: भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए किए गए इंतजाम पर्याप्त थे या नहीं?
इन सभी बिंदुओं की जांच के बाद ही हादसे के पीछे के वास्तविक कारणों और संभावित जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
विसर्जन के साथ जांच जारी रखने की चुनौती
चोरबागान में प्रतिमा विसर्जन की अनुमति मिलने के बाद अब पूजा समिति और पुलिस के सामने दोहरी जिम्मेदारी है। एक ओर धार्मिक परंपरा के अनुसार विसर्जन की प्रक्रिया पूरी करनी है, तो दूसरी ओर हादसे से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखना है।
पुलिस के अनुसार, विसर्जन तय समयसीमा और निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत ही किया जाएगा। वहीं, एसआईटी अपनी जांच जारी रखेगी। हादसे में 19 लोगों की मौत के बाद अब जांच के निष्कर्षों पर सभी की नजरें टिकी हैं।































