सुदीप बंद्योपाध्याय ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखा पत्र
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक संकट के बीच पार्टी के 20 सांसदों के दल को लेकर विवाद अब भी बना हुआ है। इन सांसदों के कथित तौर पर नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल होने के दावे के बीच तृणमूल सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने एक बार फिर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। इस बार दुर्गापूजा की व्यस्तता का हवाला दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, नवमी के दिन लोकसभा अध्यक्ष के सचिवालय को पत्र लिखकर 3 नवंबर तक का समय मांगा गया है। यह इस मामले में अतिरिक्त समय मांगने की चौथी कोशिश बताई जा रही है।
20 सांसदों के दल को लेकर असमंजस
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित होने के बाद तृणमूल कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा। पार्टी में टूट और संगठनात्मक अस्थिरता की खबरों के बीच लोकसभा में भी सांसदों के राजनीतिक रुख को लेकर सवाल उठने लगे।
रिपोर्ट के अनुसार, तृणमूल के टिकट पर चुनाव जीतने वाले 20 सांसदों ने खुद को एनसीपीआई से जुड़ा बताया है। हालांकि, लोकसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनकी पार्टी की स्थिति को लेकर विवाद बना हुआ है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि इन सांसदों को किस दल का सदस्य माना जाए।
अभिषेक बनर्जी ने दायर की थी सदस्यता रद्द करने की याचिका
इस विवाद ने जून में कानूनी मोड़ लिया, जब तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष संबंधित 20 सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग करते हुए अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। शीर्ष अदालत ने लोकसभा अध्यक्ष के सचिवालय को नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अध्यक्ष के सचिवालय ने संबंधित 20 सांसदों को पत्र भेजकर मामले में जवाब मांगा था।
अब इन सांसदों की राजनीतिक संबद्धता और संभावित दल-बदल को लेकर आगे की प्रक्रिया उनके जवाब और संबंधित संवैधानिक नियमों पर निर्भर करेगी।
अगस्त से लगातार मांगा जा रहा है अतिरिक्त समय
सूत्रों के अनुसार, अगस्त से लोकसभा अध्यक्ष के सचिवालय की ओर से जब भी सुदीप बंद्योपाध्याय और काकली घोष दस्तीदार जैसे सांसदों को पत्र भेजे गए, तब-तब अतिरिक्त समय की मांग की गई।
इससे पहले समय बढ़ाने के लिए अलग-अलग कारण बताए गए थे। अब चौथी बार समय मांगते हुए दुर्गापूजा की व्यस्तता का हवाला दिया गया है। सांसदों की ओर से 3 नवंबर तक की मोहलत मांगी गई है।
आगे क्या होगा?
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि संबंधित सांसदों की वास्तविक संसदीय संबद्धता को लेकर लोकसभा अध्यक्ष का सचिवालय क्या रुख अपनाता है। यदि दल-बदल से जुड़े आरोपों पर औपचारिक कार्यवाही आगे बढ़ती है, तो इसका असर तृणमूल कांग्रेस के संसदीय संगठन और पश्चिम बंगाल की राजनीति पर पड़ सकता है।
फिलहाल, अतिरिक्त समय की मांग के बाद मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। लोकसभा अध्यक्ष के सचिवालय की ओर से समय बढ़ाने के अनुरोध पर अंतिम निर्णय की जानकारी सामने आने के बाद ही अगली स्थिति स्पष्ट होगी।































