दो संसदीय स्थायी समितियों के अध्यक्ष बदले गए; काकोली घोष दस्तीदार को रसायन एवं उर्वरक समिति की जिम्मेदारी, भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी बने वाणिज्य समिति के अध्यक्ष
कोलकाता/नई दिल्ली : संसद की विभिन्न विभागीय स्थायी समितियों के पुनर्गठन के दौरान दो समितियों के अध्यक्ष पदों पर बदलाव किया गया है। तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी समर्थक खेमे के सांसदों कीर्ति आजाद और डोला सेन को उनके पदों से हटा दिया गया है। उनकी जगह काकली घोष दस्तीदार और भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह फेरबदल राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से किए गए पुनर्गठन का हिस्सा है।
काकोली घोष दस्तीदार को रसायन एवं उर्वरक समिति की कमान
रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष पद से कीर्ति आजाद को हटाकर काकोली घोष दस्तीदार को नियुक्त किया गया है। काकोली पहले तृणमूल कांग्रेस में थीं और अब नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) की मुख्य सचेतक हैं। वह उन सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल से अलग होकर नया राजनीतिक रास्ता चुना है।
डोला सेन की जगह सुधांशु त्रिवेदी
वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष पद पर भी बदलाव हुआ है। अब तक इस समिति की अध्यक्ष तृणमूल सांसद डोला सेन थीं। उन्हें हटाकर भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी को यह जिम्मेदारी दी गई है।
दोनों समितियों के अध्यक्ष बदलने के अलावा, पुनर्गठन में बड़े बदलाव नहीं किए गए हैं। कई अन्य समितियों के मौजूदा अध्यक्षों को उनके पदों पर बरकरार रखा गया है।
कई मौजूदा अध्यक्षों को दोबारा जिम्मेदारी
पुनर्गठन के बाद डीएमके सांसद तिरुचि शिवा और के. कनिमोझी को क्रमशः उद्योग तथा खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों से संबंधित संसदीय समितियों के अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया है। एनडीए के सहयोगी दलों जनता दल (यूनाइटेड), शिवसेना (शिंदे गुट) और तेलुगु देशम पार्टी के सांसदों को भी उनकी मौजूदा जिम्मेदारियों में बनाए रखा गया है।
विदेश मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष शशि थरूर और कृषि संबंधी समिति के अध्यक्ष चरणजीत सिंह चन्नी को भी दोबारा जिम्मेदारी मिली है। कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक और समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव जैसे विपक्षी नेताओं को भी उनके पदों पर बरकरार रखा गया है।
इसके अलावा, कोयला, खान एवं इस्पात समिति के अध्यक्ष पद पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर बने रहेंगे। जल संसाधन समिति की जिम्मेदारी राजीव प्रताप रूडी के पास रहेगी, जबकि वित्त संबंधी समिति के अध्यक्ष के रूप में भर्तृहरि महताब को बरकरार रखा गया है। निशिकांत दुबे भी संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे।
रेल संबंधी संसदीय समिति में हालांकि बदलाव किया गया है। भाजपा सांसद सीएम रमेश की जगह अब पार्टी के सांसद सुधीर गुप्ता को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।
तृणमूल में बगावत के बाद बदले राजनीतिक समीकरण
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से तृणमूल कांग्रेस के भीतर मतभेद और बगावत की खबरें सामने आती रही हैं। विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन को लेकर भी पार्टी के भीतर असहमति उभरी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 59 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाने की मांग करते हुए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था, जबकि ममता बनर्जी ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को इस पद की जिम्मेदारी दी थी।
इसके बाद तृणमूल के कुछ विधायकों ने अलग रुख अपनाया। आगे चलकर पार्टी के संसदीय दल में भी टूट की खबरें सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, 20 सांसदों ने तृणमूल छोड़कर एनसीपीआई का दामन थाम लिया था। इनमें काकली घोष दस्तीदार और सुदीप बंद्योपाध्याय के नाम भी शामिल हैं।
एनडीए के साथ खड़े होने का ऐलान
19 जुलाई को एनसीपीआई के संसदीय दल की पहली बैठक के बाद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा था कि उनकी पार्टी संसद में एनडीए का समर्थन करेगी। इसके बाद एनडीए की बैठकों में भी काकली घोष दस्तीदार और उनके सहयोगियों की मौजूदगी चर्चा में रही। अब संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष पद पर काकली की नियुक्ति को तृणमूल से अलग हुए सांसदों की संसदीय भूमिका में आए बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, समिति के अध्यक्ष पदों में बदलाव और संबंधित सांसदों की राजनीतिक स्थिति अलग-अलग तथ्य हैं; नियुक्ति के औपचारिक कारणों को लेकर आधिकारिक स्पष्टीकरण उपलब्ध होने पर ही उसके आधार पर निष्कर्ष निकाला जा सकता है।































