ड्राइवर के घर पुलिस की तलाशी।नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेने के आरोपों की जांच तेज, घर से एडमिट कार्ड, बायोडाटा और बैंक दस्तावेज बरामद
कोलकाता : पश्चिम मेदिनीपुर के पूर्व तृणमूल जिला अध्यक्ष और पिंगला के पूर्व विधायक अजित माइति को एक मामले में जमानत मिलने के अगले ही दिन पुलिस ने उनके करीबी माने जाने वाले ड्राइवर के घर तलाशी अभियान चलाया। पुलिस के अनुसार, खड़गपुर लोकल थाना क्षेत्र के फूलगेड़िया में ड्राइवर प्रणब मंडल के घर से कई दस्तावेज और एक लैपटॉप बरामद किया गया है।
सुबह करीब 4 बजे ड्राइवर के घर पहुंची पुलिस
जानकारी के मुताबिक, बुधवार तड़के करीब 4 बजे पुलिस फूलगेड़िया स्थित प्रणब मंडल के घर पहुंची। तलाशी के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर विभिन्न सरकारी परीक्षाओं के एडमिट कार्ड की फोटोकॉपी, कई नौकरी अभ्यर्थियों के बायोडाटा, बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज और एक लैपटॉप बरामद किया।
इन दस्तावेजों के मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ड्राइवर के घर पर नौकरी अभ्यर्थियों के दस्तावेज और परीक्षा से संबंधित कागजात कैसे पहुंचे।
बैंक दस्तावेजों से लेनदेन की भी जांच
तलाशी में मिले बैंक संबंधी दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनमें किसी तरह के आर्थिक लेनदेन का रिकॉर्ड है या नहीं। साथ ही, बरामद दस्तावेजों का अजित माइती से कोई संबंध है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
एक मामले में मिली जमानत, दूसरे में पुलिस हिरासत
अजित माइति के खिलाफ पार्टी में विशेष पद दिलाने का कथित झूठा भरोसा देकर पैसे लेने के आरोप में मामला दर्ज है। इसी मामले में मंगलवार को मेदिनीपुर सीजेएम अदालत से उन्हें जमानत मिली थी।
हालांकि, उन्हें तत्काल जेल से रिहाई नहीं मिली। उन पर आईसीडीएस में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित तौर पर पैसे लेने का एक अन्य मामला भी दर्ज है। अदालत में पेश मामले के अनुसार, नौकरी दिलाने का झांसा देकर पांच लाख रुपये लेने का आरोप है।
इस मामले में 26 सितंबर को खड़गपुर लोकल थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसी मामले में मेदिनीपुर सीजेएम अदालत ने अजित माइति को चार दिनों की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया था।
जांच में सामने आएंगे दस्तावेजों के कनेक्शन
अब ड्राइवर के घर से बरामद दस्तावेजों को मामले की जांच से जोड़कर देखा जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दस्तावेजों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और इनका कथित नौकरी दिलाने के मामले से कोई संबंध है या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।































