8 अक्टूबर तक देना होगा जवाब
कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए 20 सांसदों की सदस्यता का मामला अब लोकसभा स्पीकर के सामने है। सांसदों ने अपना पक्ष रखने के लिए चार हफ्ते का समय मांगा था, लेकिन स्पीकर ने उन्हें केवल दो हफ्ते की मोहलत दी है। अब सुदीप बंद्योपाध्याय, काकली घोष दस्तीदार समेत सभी 20 सांसदों को 8 अक्टूबर तक अपना जवाब देना होगा।
स्पीकर ने पूछा- दल बदल के बाद अयोग्य क्यों न हो?
लोकसभा स्पीकर ने सांसदों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि तृणमूल कांग्रेस छोड़कर NCPI में शामिल होने के पीछे उनकी क्या वजह थी और उन पर एंटी-डिफेक्शन कानून क्यों लागू नहीं होना चाहिए। इससे पहले सांसदों को अलग-अलग चरणों में अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया गया था।
काकली घोष दस्तीदार ने कहा कि उन्हें स्पीकर का पत्र मिल गया है। उन्होंने बताया कि सांसद अपने जवाब के लिए जरूरी दस्तावेज जुटा रहे हैं और तय समय सीमा के भीतर जवाब दाखिल करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जवाब देने से पहले पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।
कल्याण बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया
तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में चार हफ्ते का समय तय किया था। उनके मुताबिक, इसी अवधि के भीतर स्पीकर को मामले में आगे की प्रक्रिया पूरी करनी है। उन्होंने कहा कि NCPI के 20 सांसदों को अब स्पीकर की ओर से तय समय के भीतर जवाब देना होगा।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
20 सांसदों की सदस्यता रद्द करने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। बुधवार को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने मामले को जल्द सुलझाने की उम्मीद जताई, हालांकि इस चरण में कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया।
इससे पहले तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने 18 जून को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के सामने 20 सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिका दाखिल की थी। आरोप था कि इन सांसदों के दल बदल के बाद एंटी-डिफेक्शन कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
22 सितंबर की डेडलाइन के बाद मांगा गया था अतिरिक्त समय
25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 20 सांसदों को नोटिस जारी किया था। लोकसभा स्पीकर और लोकसभा महासचिव से भी जवाब मांगा गया था। इसके बाद लोकसभा सचिवालय के जरिए संबंधित सांसदों को नोटिस भेजकर उनका पक्ष मांगा गया।
सांसदों को पहले 22 सितंबर तक जवाब देने के लिए कहा गया था। समय सीमा खत्म होने के पहले सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार समेत संबंधित सांसदों ने अतिरिक्त समय की मांग की। उन्होंने करीब एक महीने का समय मांगा था, लेकिन स्पीकर ने चार हफ्ते की मांग स्वीकार करने के बजाय दो हफ्ते की मोहलत दी। अब 8 अक्टूबर तक उनके जवाब के बाद इस मामले में अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
































